7 वर्षों की यह अवधि देती है असीम ऊर्जा, साहस और पराक्रम की शक्ति
ग्रहों की चाल और महादशाओं का जीवन पर गहरा असर पड़ता है। बात करें लाल ग्रह मंगल की, तो ज्योतिष में इसे ग्रहों के सेनापति की उपाधि प्राप्त है। मंगल साहस, ऊर्जा, क्रोध, भूमि, शक्ति, पराक्रम और भाई का कारक है। कुंडली में जब मंगल की महादशा शुरू होती है तो, व्यक्ति के जीवन में नई-नई चुनौतियां भी आरंभ हो जाती हैं। हालांकि उचित मार्गदर्शन और ज्योतिषीय उपायों से इसे सकारात्मक भी बनाया जा सकता है। अगर आप यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि, मंगल की महादशा क्या है, यह कितने वर्ष की होती है, मंगल महादशा के क्या लक्षण हैं, जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है और मंगल की महादशा में अन्य ग्रहों की अतंर्दशा का फल कैसा होता है तो यहां विस्तार से पढ़ते रहें।
सूर्य, चंद्रमा, गुरु और अन्य सभी ग्रह एक निश्चित अवधि के लिए व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। इस अवधि को ज्योतिष में महादशा कहा जाता है। जब यह अवधि मंगल ग्रह की होती है तो इसे मंगल की महादशा या मंगल महादशा कहा जाता है। किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की महादशा का प्रभाव 7 वर्षों तक रहता है। मंगल की महादशा चंद्रमा की महादशा के बाद और राहु की महादशा से पहले आती है। हर व्यक्ति को अपने जीवन में इस महादशा का सामना जरूर करना पड़ता है। कुंडली में मंगल ग्रह अगर कमोजर या पीड़ित हो तो महादशा की अवधि कष्टकारी हो जाती है, वहीं मंगल के मजबूत होने पर कई अच्छी चीजें होती हैं।
मंगल की महादशा के लक्षण शुभ और अशुभ दोनों तरह के होते हैं। यह किसके लिए शुभ रहेगा और किसके लिए अशुभ, यह पूरी तरह से व्यक्ति की जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। मंगल महादशा के शुभ लक्षणों में अत्यधिक पराक्रमी, नेतृत्व गुण, आत्मविश्वासी और ऊर्जावान होना शामिल है। वहीं चिड़चिड़ापन, उग्रता, रिश्तेदारों से मतभेद, रक्त संबंधी विकार, चोट लगना या सर्जरी की संभावना बढ़ना आदि मंगल महादशा के अशुभ लक्षण हैं।
मंगल की महादशा का प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर अलग-अलग पड़ता है। कुंडली में मंगल शुभ, मजबूत और मित्र राशियों के साथ हो तो महादशा की अवधि सुनहरे अवसर की तरह हो सकती है। वहीं अशुभ, नीच या कमजोर मंगल के कारण महादशा के दौरान संघर्ष, आक्रामकता, बीमारी, दुर्घटना, कानूनी विवाद और भूमि संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। जानें मंगल की महादशा के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में-
अशुभ मंगल महादशा के प्रभाव
मंगल महादशा की अवधि 7 वर्ष की होती है, जिसे 9 अंतर्दशाओं में विभाजित किया गया है। इनमें मंगल और अंतर्दशाओं के ग्रहों का मिला-जुला प्रभाव रहता है। आइए जानते हैं मंगल की महादशा में अंतर्दशा ग्रह, अवधि और इसके मुख्य प्रभाव-
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अंतर्दशा ग्रह |
अवधि (7 वर्ष) |
प्रभाव |
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मंगल- मंगल |
4 महीना 27 दिन |
ऊर्जा, साहत, तेज और पराक्रम बढ़ जाता है। |
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मंगल- राहु |
12 महीना 17 दिन |
शत्रु भय, रक्त विकार, दुर्घटना और पारिवारिक कलह जैसी समस्या रहती है। |
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मंगल- गुरु |
11 महीना 5 दिन |
धन लाभ, ज्ञान और सेहत को लेकर मिले-जुले प्रभाव देखने को मिलते हैं। |
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मंगल- शनि |
1 साल एक महीना 9 दिन |
कार्यक्षेत्र में संघर्ष, तनाव, मानसिक अशांति और भाइयों व मित्रों से मतभेद। |
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मंगल- बुध |
11 महीना 27 दिन |
व्यापार में तरक्की और आर्थिक लाभ। बौद्धिक विकास के लिए समय अच्छा रहता है। |
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मंगल- केतु |
4 महीना 27 दिन |
अज्ञात भय, चोट-चपेट, त्वचा या रक्त संबंधी समस्याओं की आशंका। |
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मंगल- शुक्र |
1 साल 2 महीना |
भौतिक सुख-सुविधा में वृद्धि, पारिवारिक सुख और प्रेम संबंधों में मधुरता। |
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मंगल- सूर्य |
4 महीना 6 दिन |
स्वभाव में अहंकार और अधिक उग्रता, लेकिन उच्च पद या सरकारी क्षेत्र से लाभ की संभावना भी। |
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मंगल- चंद्रमा |
7 महीना |
धन-संपत्ति, भूमि-भवन और वाहन सुख का लाभ। |
मंगल की महादशा में पहली अंतर्दशा मंगल की ही होती है। इस समय व्यक्ति के भीतर ऊर्जा का संचार तेजी से बढ़ता है। साहस, सफलता और विरोधियों से निपटने की प्रवृत्ति तेज होती है। लेकिन इस समय जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बड़ा नुकसान भी करा सकता है।
मंगल की महादशा में राहु की महादशा लगना चुनौतीपूर्ण होता है। मंगल, अग्नि और राहु को वायु तत्व माना गया है। वायु अग्नि को भड़काने का कार्य करती है। इसलिए इसे अंगारक योग कहा जाता है। इस अवधि में व्यक्ति के भीतर क्रोध और भ्रम बढ़ता है। मंगल में राहु की अंतर्दशा तनाव, अज्ञात भय, रक्त विकार, दुर्घटना और पारिवारिक कलह को बढ़ाती है।
मंगल महादशा में गुरु की महादशा को शुभ माना जाता है। गुरु की बुद्धि और मंगल की शक्ति जब मिलती है तो व्यक्ति सही दिशा में कार्य करता है और सफलता पाता है। इस अवधि में व्यक्ति की रुचि धर्म-कर्म के कार्यों में बढ़ती है और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। हालांकि कुछ मामलों में सेहत को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
मंगल और शनि दोनों को अति क्रूर ग्रह माना जाता है। इसलिए मंगल की महादशा में शनि की अंतर्दशा का समय संघर्षपूर्ण होता है। यह ऐसा समय होता है, जब किसी कार्य के लिए व्यक्ति को अधिक मेहनत करने की जरूरत रहती है। जबकि फल बहुत देर से मिलता है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मी और अधिकारियों से मनमुटाव की स्थिति रहती है। इसलिए ज्योतिष इस समय धैर्य रखने की सलाह देते हैं।
मंगल साहस और बुध बुद्धि के कारक हैं। मंगल की महादशा में बुध की अंतर्दशा का तालमेल मिलाजुला फलदायी होता है। इस समय नए-नए विचार बिजनेस में तरक्की करा सकते हैं। लेकिन बुध मजबूत न हो तो निवेश में घाटा, त्वचा संबंधी रोग और नसों में परेशानी हो सकती है। इसलिए इस समय सूझबूझ से काम करने या निर्णय लेना जरूरी होता है।
मंगल की महादशा में केतु की अंतर्दशा का समय व्यक्ति की मानसिक स्थिति के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। यह अवधि व्यक्ति के भीतर अज्ञात भय और असुरक्षा की भावना को बढ़ाती है। अगर कुंडली में मंगल और केतु दोनों शुभ नहीं हैं तो समस्याएं चार गुना बढ़ सकती हैं। इस समय शस्त्र और अस्त्र से बचने की सलाह दी जाती है।
मंगल की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा प्रेम और दांपत्य जीवन में मधुरता लाती है। लेकिन मंगल की स्थिति कुंडली में बहुत अधिक उग्र होने पर समस्या हो सकती है। मंगल उत्साह और शुक्र विलासिता का कारक है। ऐसे में इन दोनों ग्रहों के प्रभाव से जीवन में भोग और ऊर्जा का संतुलन बनता है।
सूर्य और मंगल दोनों अग्नि प्रधान ग्रह हैं और दोनों के बीच मित्रता का भाव भी है। ऐसे में मंगल की महादशा में जब सूर्य की अंतर्दशा शुरू होती है तो व्यक्ति का आत्मविश्वास तेजी से बढ़ता है। व्यक्ति कठिन कामों को करने से लिए प्रेरित होता है और उसे हल भी कर लेता है। यह समय कार्यक्षेत्र में उन्नति, राजनैतिक सफलता और भूमि संबंधी लाभ दिला सकता है।
मंगल और चंद्रमा के योग को लक्ष्मी योग के समान माना जाता है। कुंडली में मंगल और चंद्रमा का एक साथ होना जातक को धन-धान्य का लाभ कराता है। इस समय माता के साथ संबंध मजबूत होते हैं, धन की वृद्धि होती है, मांगलिक कार्य का आयोजन होता है और यात्राओं के योग बनते हैं।
हर व्यक्ति के मन में यह सवाल रहता है कि इस समय उसके जीवन में किस ग्रह का प्रभाव है। वैदिक ज्योतिष में इसे महादशा और अंतर्दशा के रूप में समझा जाता है। कुंडली में कौन सी महादशा चल रही है, यह कैसे जानें? एस्ट्रोटॉक के ऑनलाइन दशा कैलकुलेटर की मदद से आप विंशोत्तरी दशा की गणना कर सकते हैं। यहां आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान जैसी सामान्य जानकारियां दर्ज कर यह जान सकते हैं कि आपकी कुंडली में मंगल महादशा चल रही है या नहीं। इससे आप न सिर्फ यह जानेंगे कि आपकी कुंडली में इस समय कौन की दशा चल रही है, बल्कि यह भी जानेंगे कि, इसका आपके आने वाले जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।
A: नहीं, मंगल की महादशा कुंडली में अगर योगकारक है तो, यह बहुत शुभ साबित हो सकता है।
A: हां, मंगल की महादशा होने पर विवाह संभव है। बशर्ते जातक मांगलिक न हो। मांगलिक होने पर उचित मिलान और दोष निवारण पूजा के बाद विवाह कर सकते हैं।
A: मंगल की महादशा में राहु की अंतर्दशा को सबसे अशुभ और कष्टकारी माना जाता है।
A: मंगल की महादशा में गुरु, बुध, शुक्र की अंतर्दशा अच्छी मानी जाती है।
A: इसके लिए किसी ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाएं। आप अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और स्थान डालकर दशा कैलकुलेटर के माध्यम से भी तुरंत महादशा या अंतर्दशा की जांच कर सकते हैं।