सूर्य महादशा क्या होती है? - प्रभाव, लक्षण और उपाय

6 वर्षों की यह अवधि लाती है आत्म-विश्वास, पद और प्रतिष्ठा की चमक

ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा या स्वामी की उपाधि प्राप्त है। सूर्य को आत्मा, स्वास्थ्य मान-प्रतिष्ठा, पिता और सरकारी नौकरी का प्रतिकारक माना जाता है। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह का काफी महत्व है। जन्म कुंडली में जब सूर्य की महादशा शुरू होती है, तो जीवन में कई बड़े परिवर्तन के संकेत मिलते हैं। सूर्य महादशा की अवधि लगभग 6 वर्ष की होती है और इस दौरान जातक की दशा और दिशा पूरी तरह बदल जाती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि, सूर्य की महादशा क्या है, इसके कारण क्या है, जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है और सूर्य की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का फल कैसा होता है तो यहां विस्तार से पढ़ते रहें। 

सूर्य की महादशा क्या होती है?

विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्ष के मानव जीवनकाल को ग्रहों की महादशा में बांटा गया है, जिसमें प्रत्येक ग्रह एक निश्चित अवधि तक व्यक्ति के जीवन पर शासन करता है। सूर्य महादशा की बात करें तो यह 6 वर्षों तक चलती है, जो शुक्र की महादशा (20 वर्ष) के बाद और चंद्रमा की महादशा (10 वर्ष) के पहले आती है। सभी ग्रहों में सूर्य की महादशा अपेक्षाकृत छोटी लेकिन महत्वपूर्ण होती है। सूर्य महादशा की अवधि में व्यक्ति अपने अस्तित्व को स्थापित करने के लिए काफी संघर्ष करता है, अक्रामक दिखाई दे सकता है या फिर बाहरी रूप से बहुत तेज हो सकता है। लेकिन कुंडली में सूर्य मजबूत हो तो व्यक्ति को बड़ी उपलब्धियां भी हासिल हो सकती हैं। 

सूर्य की महादशा के मुख्य लक्षण

सूर्य की महादशा से व्यक्ति के जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल जाती हैं। जब किसी जातक की कुंडली में सूर्य की महादशा आरंभ होती है तो सबसे पहले उसका स्वभाव, व्यवहार, आदत और जीवनशैली में बदलाव नजर आने लगता है। सूर्य महादशा के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के लक्षण हो सकते हैं। इस समय व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, नौकरी में पदोन्नति के योग बनते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है। हालांकि सेहत संबंधी परेशानी भी हो सकती है। 

सूर्य की महादशा का प्रभाव

सूर्य की महादशा का प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर अलग-अलग पड़ता है। कुंडली में सूर्य अगर सिंह, मेष या मित्र राशियों में स्थित, केंद्र या फिर त्रिकोण में हो या शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो यह अवधि व्यक्ति के लिए उन्नतिकारक होती है। वहीं सूर्य नीच राशि तुला में, शत्रु भाव में या फिर पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो जीवन में संघर्ष, चुनौती और संबंधों में तनाव हो रह सकता है। जानें सूर्य की महादशा के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में- 

शुभ सूर्य महादशा के प्रभाव  

  • सूर्य महादशा के शुभ प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति में नेतृत्व करने की क्षमता में विकास होता है।
  • सरकारी क्षेत्र में लाभ मिलता है, नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि के योग बनते हैं।
  • सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। कार्यक्षेत्र में आपके कार्य की सराहना होती है और लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेते हैं।
  • सूर्य महादशा शुभ हो तो पिता और वरिष्ठजनों के साथ संबंध गहरे होते हैं। पैतृक संपत्ति से लाभ होता है।
  • शुभ सूर्य की महादशा धर्म, सत्य और आध्यात्मिक रूचि को बढ़ाती है।

अशुभ सूर्य महादशा के प्रभाव  

  • सूर्य जब कमजोर या नीच हो तो अहंकार में वृद्धि होती है और रिश्तों में दूरी आती है।
  • सूर्य महादशा के अशुभ प्रभाव से पिता और वरिष्ठजनों के साथ मतभेद हो सकते हैं।
  • सेहत में गिरावट होती है। खासकर हृदय रोग, रक्तचाप, आंखों की कमजोरी, हड्डी और सिर से जुड़ी समस्याएं होती हैं।
  • सरकारी कामों में देरी या असफलता मिलती है। सरकारी विभागों से भी विवाद हो सकता है।
  • नौकरी में अधिकारियों संग असहमति बढ़ती है, जिससे नौकरी जाने या पद खोने का खतरा रहता है।

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सूर्य महादशा अंतर्दशा अवधि

सूर्य महादशा की अवधि 6 साल की होती है, जिसे 9 अंतर्दशाओं में विभाजित किया गया है। इनमें सूर्य और अंतर्दशाओं के ग्रहों का मिलाजुला प्रभाव रहता है। आइए जानते हैं सूर्य महादशा में अंतर्दशा ग्रह, अवधि और मुख्य प्रभाव:

अंतर्दशा ग्रह

अवधि (6 वर्ष)

प्रभाव

सूर्य- सूर्य

3 महीने 18 दिन

आत्मविश्वास में वृद्धि, करियर में नई संभावनाएं, सेहत के प्रति सतर्कता और पिता से जुड़े काम।

सूर्य- चंद्रमा

6 महीने

भावनात्मक जागरूकता, माता का प्रभाव और सामाजिक लोकप्रियता में वृद्धि। मानसिक शांति (चंद्र शुभ हो तो)।

सूर्य- मंगल

4 महीने 6 दिन

साहस, संपत्ति, उच्चाधिकारियों के साथ संघर्ष, ऊर्जा का प्रभाव और सर्जरी की संभावना।

सूर्य- राहु

10 महीने 24 दिन

करियर में संभावनाएं, विदेशी संपर्क, धोखा मिलने की संभावना और लक्ष्यों में भ्रमित होना।

सूर्य- बृहस्पति

9 महीने 18 दिन

आध्यात्मिक विकास, शिक्षा, ज्ञान और सरकारी क्षेत्र में सफलता।

सूर्य- शनि

11 महीने 12 दिन

अनुशासन, कठिनाई, सेहत संबंधी चुनौती, पिता की सेहत की चिंता।

सूर्य-  बुध

10 महीने 6 दिन

संचार कौशल, व्यापार, लेखन क्षमता में वृद्धि।

सूर्य- केतु

4 महीने 6 दिन

भौतिक लक्ष्यों में कमी, पूर्व जन्म के कर्म पाना, परिवर्तन और आध्यात्मिक झुकाव।

सूर्य- शुक्र

12 महीने

रोमांस, विलासिता, भौतिक सुख-सुविधा और आर्थिक लाभ।

 

सूर्य की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा और उनके फल

सूर्य की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा

सूर्य-सूर्य अंतर्दशा की अवधि 3 महीने 18 दिन होती है। यह समय करियर, स्वास्थ्य, निर्णय आदि के लिए महत्वपूर्ण होता है। सूर्य यदि कुंडली में सूर्य कारक हो, उच्च का हो और पाप प्रभाव से रहित हो तो महादशा में अंतर्दशा के समय भी शुभ फल देता है। इस समय धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है और पदोन्नति के अवसर मिलते हैं। हालांकि क्रोध पर नियंत्रण रखना जरूरी होता है।

सूर्य की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा

सूर्य की महादशा में अगर चंद्रमा की अंतर्दशा चल रही हो तो यह समय जातक के लिए लाभकारी होता है। इस अवधि में मान-सम्मान में खूब वृद्धि होती है और पिता के साथ अच्छे संबंध स्थापित होते हैं। ज्योतिष में सूर्य को पिता और चंद्रमा को मन तथा माता का कारक माना गया है। ऐसे में जब सूर्य की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा चलती है तो माता-पिता दोनों का साथ मिलता है।

सूर्य की महादशा में मंगल की अंतर्दशा

किसी जातक की कुंडली में जब सूर्य की महादशा के साथ मंगल की अंतर्दशा चलती है तो यह व्यक्ति को पराक्रमी बनाता है। इस अवधि में काम और कार्यक्षेत्र में खूब तरक्की होती है। लेकिन कुछ स्थितियों में रक्त, त्वचा या चोट संबंधी परेशानियों की संभावना भी बढ़ जाती है।

सूर्य की महादशा में राहु की अंतर्दशा

सूर्य में राहु की अंतर्दशा 10 महीने 24 दिन की होती है। यह समय व्यक्ति को काफी परेशान कर सकता है। डिप्रेशन, मानहानि और तनाव जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। राहु भ्रम पैदा करता है। इसलिए इस समय लिया गया छोटा सा गलत निर्णय भी बड़ी समस्या का कारण बन सकता है।

सूर्य की महादशा में गुरु की अंतर्दशा

कुंडली में सूर्य की महादशा में गुरु की अंतर्दशा का चलना शुभ संगम होता है। यह अवधि 9 महीने 18 दिन की होती है, जिसमें ज्ञान और आध्यात्म में विस्तार होता है। यह समय जातक को पुरस्कार, उपाधि या पदोन्नति दिला सकता है। इस समय विवाह के भी अच्छे योग बनते हैं और संतान के लिए भी यह बेहतरीन समय होता है। कुंडली में यदि सूर्य और गुरु दोनों मजबूत हो तो जातक इस समय का भरपूर लाभ उठा सकते हैं। 

सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा

सूर्य और शनि के बीच पिता-पुत्र का संबंध होने के बाद भी शत्रुता का भाव होता है। इसलिए सूर्य महादशा के दौरान शनि अंतर्दशा की 11 महीने 1 दिन की अवधि सामान्य तौर पर चुनौतीपूर्ण रहती है। करियर में देरी, स्वास्थ्य समस्या, मेहनत का फल देर से मिलना, पिता से अनबन, अधिकारियों संग टकराव जैसी चिंताएं हो सकती हैं। हालांकि जातक अगर अनुशासित और मेहनती है तो शनि उसे पुरस्कृत भी कर सकता है।

सूर्य की महादशा में बुध की अंतर्दशा

सूर्य की महादशा में बुध की अंतर्दशा का चलना शुभ माना जाता है। सूर्य और बुध दोनों जातक को सक्षम बनाते हैं।  इस समय जातकों के प्रमोशन के योग बनते है, संचार-कौशल में निखार आता है, व्यापार में उन्नति होती है और कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान मिलता है। 

सूर्य की महादशा में केतु की अंतर्दशा

किसी जातक की कुंडली में जब सूर्य की महादशा में केतु की अंतर्दशा चलती है तो यह समय विशेषकर कार्यक्षेत्र में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इस अवधि में शत्रुओं का संख्या में वृद्धि होती है, बिजनेस में घाटा होता है और कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। इसलिए ज्योतिष इस समय सही निर्णय लेने और धैर्य रखने की सलाह देते हैं।

सूर्य की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा

सूर्य की महादशा में जब शु्क्र की अंतर्दशा चलती है, तब यह समय जातक के लिए कुछ परेशानी वाला रह सकता है। इस समय प्रेम जीवन उतार-चढ़ाव वाला रहता है। साथी के साथ विवाद, धन के मामले में परेशानी और निवेश में जोखिम उठाना पड़ता है। यह अवधि एक साल की होती है, जिसमें ज्योतिष सोच-समझकर फैसले लेने और वाणी पर नियंत्रण रखने की सलाह देते हैं।

सूर्य की महादशा में क्या करें और क्या न करें

सूर्य की महादशा में क्या करें

  • जिनकी कुंडली में सूर्य की महादशा होती है, उन्हें नियमित सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। 
  • ऊँ घृणि सूर्याय नम:, ऊँ रं रवये नम: मंत्र का जाप करें या आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना भी लाभकारी रहेगा।
  • रविवार के दिन गेहूं, लाल वस्त्र, लाल चंदन या तांबे की चीजों का दान करना शुभ होता है।
  • सूर्य की महादशा होने पर जीवनशैली में सुधार करें। क्रोध से बचें और संयम अपनाएं। 

सूर्य की महादशा में क्या न करें

  • सूर्य की महादशा में रविवार के दिन काले और नीले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करना चाहिए। ये रंग सूर्य की शुभ ऊर्जा को कमजोर करते हैं।
  • जिस काम को आपने नहीं किया है, उसका उपहार या धन न लें। मुफ्त का उपहार लेने से आर्थिक समस्या बढ़ सकती है।
  • पिता, गुरु, वरिष्ठजन और बड़ों का अनादर भूलकर भी न करें। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से मतभेद मोल न लें। 

सूर्य महादशा को शांत और मजबूत करने के उपाय

  • जन्म कुंडली में सूर्य कमजोर, दुर्बल या पीड़ित हो तो सूर्य महादशा का समय जातक के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसे दूर करने के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं।
  • सूर्य से शुभ फल पाने के लिए माणिक्य रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। लेकिन ज्योतिषी से सलाह लेकर या कुंडली दिखाकर ही रत्न धारण करें। आप एस्ट्रोटॉक पर ज्योतिष से फ्री चैट या कॉल के जरिए उपाय या रत्न संबंध जानकारी ले सकते हैं।
  • सूर्य बीज मंत्र  "ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" का नियमित 108 बार जाप करने से सूर्य महादशा की सकारात्मक क्षमता बढ़ती है। ध्यान रखें कि, मंत्र का जाप सूर्योदय के समय ही करें।
  • रविवार के दिन व्रत रखें, नमक का त्याग करें और सूर्यास्त के पहले सिर्फ एक बार ही भोजन करें।

अपनी सूर्य महादशा कैसे देखें?

हर व्यक्ति के मन में यह सवाल रहता है कि, इस समय उसके जीवन में किस ग्रह का प्रभाव है। वैदिक ज्योतिष में इसे महादशा और अंतर्दशा के रूप में समझा जाता है। लेकिन अहम सवाल यह है कि कुंडली में कौन सी महादशा चल रही है, यह कैसे जानें? एस्ट्रोटॉक के ऑनलाइन दशा कैलकुलेटर की मदद से आप विंशोत्तरी दशा की गणना कर सकते हैं। यहां आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान जैसी सामान्य जानकारियां दर्ज कर यह जान सकते हैं कि आपकी कुंडली में सूर्य महादशा चल रही है या नहीं।

इससे आप न सिर्फ यह जानेंगे कि आपकी कुंडली में इस समय कौन की दशा चल रही है, बल्कि यह भी जानेंगे कि, इसका आपके आने वाले जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: क्या सूर्य की महादशा में शादी हो सकती है?

A: हां, खासकर जब सूर्य में शुक्र या चंद्र की अंतर्दशा होती है तो विवाह के योग बनते हैं।

Q: सूर्य महादशा में किस ग्रह की अंतर्दशा सबसे अशुभ होती है?

A: सूर्य की महादशा में राहु की अंतर्दशा या सूर्य महादशा में केतु की अंतर्दशा को सबसे कठिन समय माना जाता है।

Q. सूर्य की महादशा अच्छी होती है बुरी?

A: सूर्य की महादशा अच्छी होगी या बुरी यह कुंडली में सूर्य की स्थिति, भाव, राशि और युति पर निर्भर करती है।

Q. सूर्य की महादशा खत्म होने के बाद क्या होता है?

A: सूर्य की महादशा खत्म होने के बाद चंद्रमा की महादशा शुरू होती है, जिसकी अवधि 10 साल होती है।

Q.सूर्य नीच हो तो महादशा का प्रभाव कैसा रहेगा?

A: सूर्य नीच का हो तो महादशा के समय संघर्ष, आत्मविश्वास में कमी, आंखों की समस्य और पिता की सेहत में परेशानी रहती है।