चंद्रमा महादशा क्या होती है? - प्रभाव, लक्षण और उपाय

10 वर्षों की यह अवधि लाती है मानसिक शांति, भावनाएं और संवेदनशीलता

ज्योतिष में चंद्रमा ग्रह का विशेष स्थान होता है। जिस प्रकार सूर्य आत्मा का कारक है, उसी तरह चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। इसलिए जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अधिक महत्व रखती है। कुंडली में जब चंद्रमा की महादशा लगती है तो जीवन में कई बड़े परिवर्तन नजर आने लगते हैं। चंद्रमा की महादशा के दौरान जातक के जीवन की दशा और दिशा पूरी तरह से बदल जाती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि, चंद्रमा की महादशा क्या है, यह कितने वर्ष की होती है, चंद्रमा महादशा के लक्षण क्या है, जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है और चंद्रमा की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का फल कैसा होता है तो यहां विस्तार से पढ़ते रहें।

चंद्रमा की महादशा क्या होती है?

विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्ष के मानव जीवनकाल को ग्रहों की अवधियों में बांटा गया है, जिसमें प्रत्येक ग्रह एक निश्चित अवधि तक व्यक्ति के जीवन पर शासन करता है। चंद्रमा की महादशा की अवधि 10 वर्षों की होती है। यह ऐसा कालखंड होता है जब व्यक्ति की भावनाएं, संवेदनशीलता और मानसिक स्थिति पर तेजी से परिवर्तन देखने को मिलता है। कुंडली में यदि चंद्रमा शुभ या मजबूत स्थिति में हो तो महादशा के 10 वर्ष की अवधि में जातक को सुख-शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। वहीं इसके विपरीत अगर चंद्रमा कमजोर या पीड़ित हो तो मानसिक तनाव और अस्थिरता बढ़ती है। चंद्रमा की महादशा सूर्य की महादशा के बाद और मंगल की महादशा से पहले आती है।

चंद्रमा की महादशा के मुख्य लक्षण

चंद्रमा सौंदर्य, स्त्रीत्व, माता, चांदी, शुद्धता, शीतलता, कला और कोमलता आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए जब चंद्रमा की महादशा लगती है तो जातक का झुकाव कलात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ता है। शुभ चंद्रमा की महादशा के लक्षण में मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, आर्थिक उन्नति होती है। वहीं मानसिक तनाव का बढ़ना, माता को कष्ट, निर्णय लेने में असमर्थता अशुभ या पीड़ित चंद्रमा महादशा के लक्षण हैं।

चंद्रमा की महादशा का प्रभाव

चंद्रमा की महादशा का प्रभाव हरेक व्यक्ति के जीवन पर अलग-अलग पड़ता है। कुंडली में चंद्रमा राहु-केतु या शनि के प्रभाव में जैसे विष योग या ग्रहण योग हो तो कई तरह की समस्याएं आती हैं। नीच नवांश में स्थित चंद्रमा की दशा भी विभिन्न तरह की हानि का कारण बनती है। लेकिन उच्च ग्रह के साथ चंद्रमा के रहने से उसकी दशा में चित्त, आनंद और सुख प्राप्त होता है। जानें चंद्रमा की महादशा के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में- 

शुभ चंद्रमा महादशा के प्रभाव  

  • कुंडली में जब चंद्रमा बलवान होता है तो मानसिक शांति बढ़ती है। हर परिस्थिति में व्यक्ति शांत और प्रसन्न रहता है।
  • आर्थिक लाभ होता है। विशेषकर जो लोग दूध, चांदी, जलीय पदार्थ या सफेद वस्तुओं का व्यापार करते हैं, उन्हें मुनाफा होता है।
  • चंद्रमा महादशा की शुभ स्थिति में व्यक्ति को माता का सहयोग या माता के माध्यम से धन का लाभ होता है।

अशुभ चंद्रमा महादशा के प्रभाव

  • चंद्रमा जब पीड़ित हो तो बिना किसी कारण व्यक्ति को डर लगना, घबराहट, अवसाद या नींद न आने की समस्या रहती है।
  • माता के साथ वैचारिक मदभेद होते हैं। माता की सेहत भी अच्छी नहीं रहती है।
  • चंद्रमा मदाहशा की अशुभ स्थिति में व्यक्ति का मन बार-बार भटकता है। वह किसी एक काम पर टिक नहीं पाता, इसलिए वह सही निर्णय भी नहीं ले पाता।

चंद्रमा महादशा अंतर्दशा अवधि

चंद्रमा महादशा की अवधि 10 वर्ष की होती है, जिसे 9 अंतर्दशाओं में विभाजित किया गया है। इनमें चंद्रमा और अंतर्दशाओं के ग्रहों का मिलाजुला प्रभाव रहता है। आइए जानते हैं चंद्रमा की महादशा में अंतर्दशा ग्रह, अवधि और इसके मुख्य प्रभाव-

अंतर्दशा ग्रह

अवधि (10 वर्ष)

प्रभाव

चंद्रमा- चंद्रमा

10 महीने

व्यक्ति का झुकाव सुख-सुविधा की चीजों, जैसे वस्त्र, आभूषण और उत्तम भोजन की ओर बढ़ता है।

चंद्रमा- मंगल

7 महीने

स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन आ सकता है। लेकिन भूमि, धन और संपत्ति का योग भी बनता है।

चंद्रमा- राहु

1 वर्ष 8 महीने

मानसिक भ्रम बढ़ता है, डरावने सपने आते हैं और अचानक कामों में रुकावटें पैदा हो जाती हैं।

चंद्रमा- गुरु

1 वर्ष 4 महीने

ज्ञान में वृद्धि होगी और मांगलिक कार्यों के योग बनेंगे। इसमें सभी कार्यों में भाग्य का साथ मिलता है।

चंद्रमा- शनि

1 वर्ष 7 महीने

सफलता के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है और फल भी देरी से मिलता है।

चंद्रमा- बुध

1 वर्ष 5 महीने

व्यापार के लिए शुभ समय की शुरुआत होती है। लेखन, संचार और संपादन क्षेत्र में सफलता मिलती है।

चंद्रमा- केतु

7 महीने

सांसारिक कार्यों में मन नहीं लगता। आंख और सिरदर्द की तकलीफ रहती है।

चंद्रमा- शुक्र

1 वर्ष 8 महीने

घर, वाहन और भौतिक सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ता है। वैवाहिक संबंध बिगड़ सकते हैं।

चंद्रमा-सूर्य

6 महीने

माता-पिता को कष्ट, मान-सम्मान में हानि और सेहत संबंधी परेशानी हो सकती है।

चंद्रमा की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा और उनके फल

1. चंद्रमा की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा

चंद्रमा शीतलता का कारक है। चंद्रमा की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा चलती है तो इससे कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलती है। व्यक्ति महत्वपू्र्ण कामों में अच्छे निर्णय ले पाता है। हालांकि कार्य की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। चंद्रमा उच्च राशि, अपने घर या शुभ ग्रहों की दृष्टि में हो तो अंतर्दशा की अवधि में मानसिक शांति, सुख और धन के योग बनते हैं। लेकिन चंद्रमा नीच हो, पाप ग्रहों से प्रभावित हो या ग्रहण योग में हो तो मानसिक अस्थिरता और परेशानी बढ़ती है।

2. चंद्रमा की महादशा में मंगल की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में मंगल की अंतर्दशा आती है तो साहस, ऊर्जा, पराक्रम और उत्साह में वृद्धि होती है। खासकर जब कुंडली में चंद्रमा और मंगल की युति हो को लक्ष्मी योग का निर्माण होता है, जिससे धन-धान्य भी बढ़ता है। लेकिन मंगल शत्रु राशि, नीच राशि या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो इससे अच्छा फल नहीं मिलता है। व्यक्ति में गुस्सा और तनाव भी बढ़ता है।

3. चंद्रमा की महादशा में राहु की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में राहु की महादशा आमतौर पर कठिन मानी जाती है। हालांकि राहु शुभ ग्रहों के साथ हो या उन पर दृष्टि रखे तो काम पूरे भी होते हैं। लेकिन राहु के पीड़ित होने पर धनहानि और काम में बार-बार रुकावटें आने की संभावना रहती है। इस समय व्यक्ति सेहत समस्या, अवसाद और कानूनी मामलों में फंस जाता है।

4. चंद्रमा की महादशा में गुरु की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में गुरु की अंतर्दशा व्यक्ति को ज्ञान, आध्यात्मिकता और बुद्धि प्रदान करती है। खासकर जब गुरु उच्च राशि या शुभ ग्रहों की दृष्टि में हो और चंद्रमा से केंद्र त्रिकोण, दूसरे या ग्यारहवें भाव में हो तो इसे सबसे शुभ माना जाता है। वहीं गुरु के नीच राशि में होने, शत्रु राशि या पाप ग्रहों के प्रभावित होने पर और छठे, आठवें या बारहवें भाव में होने पर आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक परेशानी की संभावना रहती है।

5. चंद्रमा की महादशा में शनि की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में शनि की अंतर्दशा 1 साल 7 महीने की होती है। इस दौरान चंद्रमा केंद्र, त्रिकोण, लाभ स्थान हो या फिर शनि उच्च राशि, स्वगृही या शुभ ग्रहों की दृष्टि में हो तो यह अवधि जातक के लिए शुभ मानी जाती है। वहीं शनि अगर छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, नीच राशि, शत्रु राशि या फिर पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो जातक का समय मुश्किलभरा हो जाता है। 

6. चंद्रमा की महादशा में बुध की अंतर्दशा

कुंडली में बुध शुभ ग्रहों के साथ हो या केंद्र, त्रिकोण जैसे भावों में हो चंद्रमा की महादशा में बुध की अंतर्दशा भी शुभ फलदायी होती है। इस समय जातक को विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं दूसरी ओर बुध नीच राशि, शत्रु राशि या फिर पाप ग्रहों की दृष्टि में अशुभ भावों में हो तो समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है और जातक को हानि उठानी पड़ सकती है।

7. चंद्रमा की महादशा में केतु की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में केतु की अंतर्दशा को अच्छा नहीं माना जाता है। इस समय कार्य में बाधा, मानसिक तनाव और सफलता रहती है। हालांकि जातक ईमानदार और मेहनती हो तो सफलता देर से सही लेकिन जरूर मिलती है। 

8. चंद्रमा की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में शुक्र की महादशा व्यक्ति को 1 साल 8 महीने तक लाभ पहुंचाती है। इस दौरान भूमि-भवन का लाभ होता है और सुख-साधन बढ़ते हैं। लेकिन चंद्रमा के कमजोर होने और शुक्र नीच राशि या शत्रु राशि से प्रभावित होने पर वैवाहिक जीवन में गलतफहमियों को बढ़ाता है।   

9. चंद्रमा की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा

चंद्रमा की महादशा में जब सूर्य की अंतर्दशा चलती है तो यह समय व्यक्ति को कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित करता है। व्यक्ति को माता-पिता दोनों का सहयोग मिलता है। लेकिन चंद्रमा के कमजोर होने और सूर्य के पाप ग्रहों से प्रभावित होने पर समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। 

चंद्रमा की महादशा में क्या करें और क्या न करें

चंद्रमा की महादशा में क्या करें

  • माता का सम्मान करें और नियमित रूप से माता के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें। 
  • माता के साथ ही माता समान स्त्रियों का सम्मान करें।
  • भगवान शिव की उपासना करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और शिव मंत्र का जाप करें।
  • चंद्रमा की महादशा में चांदी पहनना अच्छा माना जाता है।
  • अपने खान-पान में दिन के समय दूध-दही जैसे पदार्थों को शामिल करें।

चंद्रमा की महादशा में क्या न करें

  • पानी की बर्बादी करने से बचें। व्यर्थ पानी न बहाएं और नदी-तालाब को गंदा न करें।
  • रात के समय या सूर्यास्त के बाद भारी मात्रा में दूध या दही का सेवन करने से परहेज करें।
  • माता का भूलकर भी अनादर न करें। इससे चंद्र महादशा के दौरान बुरा फल मिलता है।
  • चंद्रमा की महादशा में व्यक्ति को देर रात तक जागने से बचना चाहिए, इससे मानसिक अशांति बढ़ सकती है।
  • चंद्रमा शीतलता और शांति का कारक है। इसलिए चंद्रमा महादशा में नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

चंद्रमा की महादशा को शांत और मजबूत करने के उपाय

  • चंद्रमा की महादशा के दौरान सोमवार के दिन शिवजी की उपासना करना और जलाभिषेक करना अच्छा माना जाता है।
  • चंद्रमा से शुभ फल की प्राप्ति के लिए चंद्रमा ग्रह का मंत्र 'ऊँ सोम सोमाय नम:' या चंद्रमा बीज मंत्र "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः" का 108 बार जाप कर सकते हैं।
  • सोमवार के दिन सफेद रंग की वस्तुओं जैसे दूध, शक्कर, सफेद वस्त्र, सफेद मिठाई आदि का दान गरीब या जरूरतमंदों में कर सकते हैं।
  • चंद्रमा को मजबूत करने के लिए चांदी की अंगूठी में मोती पहनना चाहिए। लेकिन ज्योतिषी से सलाह लेकर या कुंडली दिखाकर ही रत्न धारण करें। आप एस्ट्रोटॉक पर ज्योतिष से फ्री चैट या कॉल के जरिए उपाय या रत्न संबंध जानकारी ले सकते हैं।

अपनी चंद्रमा महादशा कैसे देखें ?

हर व्यक्ति के मन में यह सवाल रहता है कि, इस समय उसके जीवन में किस ग्रह का प्रभाव है। वैदिक ज्योतिष में इसे महादशा और अंतर्दशा के रूप में समझा जाता है। कुंडली में कौन सी महादशा चल रही है, यह कैसे जानें? एस्ट्रोटॉक के ऑनलाइन दशा कैलकुलेटर की मदद से आप विंशोत्तरी दशा की गणना कर सकते हैं। यहां आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान जैसी सामान्य जानकारियां दर्ज कर यह जान सकते हैं कि आपकी कुंडली में चंद्रमा महादशा चल रही है या नहीं। इससे आप न सिर्फ यह जानेंगे कि आपकी कुंडली में इस समय कौन की दशा चल रही है, बल्कि यह भी जानेंगे कि, इसका आपके आने वाले जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: क्या चंद्रमा की महादशा सभी के लिए एक समान होती है?

A: नहीं, हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है और चंद्रमा की महादशा का फल भी अलग-अलग होता है।

Q: चंद्रमा की महादशा में कौन-कौन से शुभ फल मिलते हैं?

A: चंद्रमा की महादशा में मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, जल से जुड़ा लाभ, वस्त्र, आभूषण और संतान सुख की प्राप्ति के योग बन सकते हैं।

Q: चंद्रमा की महादशा में कौन सी समस्याएं बढ़ती हैं?

A: चंद्रमा पाप ग्रहों से प्रभावित हो या निर्बल हो तो धन हानि, मानसिक तनाव, रोग, भोजन में अशुद्धता, अग्नि का भय और माता को कष्ट हो सकता है।

Q: चंद्रमा की महादशा का प्रभाव शुभ होगा या अशुभ, यह कैसे पता चलता है?

A: चंद्रमा की स्थिति, कुंडली के भाव, राशि, नवांश और चंद्रमा किस ग्रह से दृष्ट है, बल कैसा है, शुभ-अशुभ ग्रहों से संबंध कैसा है। इन स्थितियों से महादशा के प्रभाव का पता चलता है।

Q: चंद्रमा की महादशा में कौन-कौन से काम शुभ होते हैं?

A: धर्म से जुड़े कार्य, दान-पुण्य, माता की सेवा, परोपकार और जल संरक्षण जैसे कार्य करने से चंद्रमा की महादशा में भी शुभ फल मिलते हैं।