राहु महादशा क्या होती है? - प्रभाव, लक्षण और उपाय
18 वर्षों का यह दौर लाता है अप्रत्याशित बदलाव और महत्वाकांक्षा
ज्योतिष में राहु को एक रहस्यमयी, क्रूर और छाया ग्रह माना जाता है। इस ग्रह की गिनती पापी ग्रहों में की जाती है। इसके कारण ही ग्रहण लगता है। राहु की महादशा 18 वर्षों की लंबी अवधि होती है, जो व्यक्ति के जीवन में अचानक बड़े बदलाव, सफलता या संघर्ष लेकर आती है। राहु की महादशा का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। अक्सर लोग राहु की महादशा को लेकर काफी घबराते हैं। हालांकि, इसकी महादशा हमेशा नकारात्मक परिणाम ही दें ऐसा जरूरी नहीं है। इसके परिणाम व्यक्ति की कुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। एस्ट्रोटॉक के इस लेख में हम आपको राहु की महादशा के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही, उपाय व इस दौरान क्या करें क्या न करें इस बारे में भी चर्चा करेंगे।
राहु की महादशा क्या होती है?
शुक्र, शनि ग्रह के बाद ग्रह की महादशाओं में राहु की महादशा सबसे लंबी ग्रह दशाओं में एक मानी जाती है। इस दौरान व्यक्ति के जीवन में परिस्थितियां तेजी से बदलती है। राहु की महादशा 18 सालों की होती है, जो 3, 6 और 9 साल के शुभ-अशुभ क्रम में चलता है और सबसे ज्यादा चुनौतियां राहु महादशा के छठे और आठवें साल में आती है। राहु उच्च पद, राजनीति, मीडिया और सफलता के कारक हैं इसलिए इसकी महादशा के दौरान व्यक्ति को इन क्षेत्रों कई तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं।
यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु शुभ स्थिति में उपस्थित हो तो महादशा के दौरान व्यक्ति को करियर में अचानक अवसर, नई नौकरी, विदेश से जुड़े मौके, टेक्निकल या ऑनलाइन क्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा, अचानक धन लाभ होता है, राजनीति के क्षेत्र में सफलता मिलती है, व्यक्ति को नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति होती है और विदेश से जुड़े मौके मिलते हैं। वहीं अगर राहु कमजोर स्थिति में होते हैं, तो जल्दबाजी में निर्णय लेने पर परेशानी होती है, अचानक खर्च या आर्थिक स्तर पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, व्यक्ति के अंदर भ्रम, बेचैनी, असमंजस और कई बार गलत फैसले भी लेने की स्थिति पैदा हो सकती है।
राहु की महादशा के मुख्य लक्षण
राहु महादशा के दौरान व्यक्ति के जीवन में अचानक कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। कई बार यह अवधि जातक के जीवन में तरक्की और सफलता लेकर आता है, तो कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान जातक का विदेश जाने का सपना पूरा होता है, अचानक धन लाभ होता है या करियर में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। राहु की महादशा के दौरान व्यक्ति की इच्छाओं में बढ़ोतरी भी हो सकती है और मन में कई तरह के विचार चल सकते हैं। कई बार व्यक्ति किसी बात को लेकर उलझन भी महसूस कर सकता है। अगर जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति शुभ हो तो राहु की महादशा के दौरान धन के मामले में व्यक्ति रंक से राजा भी बन जाता है। वहीं कमजोर राहु होने पर भ्रम, गलत फैसले, विवाद या अनावश्यक चिंता जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
राहु की महादशा के प्रभाव
व्यक्ति की कुंडली में राहु महादशा के दौरान सकारात्मक व नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं। नीचे जानते हैं इन प्रभावों के बारे में।
शुभ राहु महादशा के प्रभाव
- राहु की शुभ स्थिति के दौरान नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति होती है।
- समाज और कार्यस्थल पर व्यक्ति की प्रतिष्ठा भी बढ़ोतरी होती है।
फैसले लेने की क्षमता मजबूत होती है। - व्यक्ति स्पष्ट बातचीत करता है और खुलकर अपनी बात रखता है।
- सरकारी नौकरी या सरकार से जुड़े कामों में सफलता मिलती है।
- पिता व परिवार का सहयोग व मार्गदर्शन मिलता है।
- व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाता है।
अशुभ राहु महादशा के प्रभाव
- नौकरी व सरकारी कामों में बार-बार रुकावटें आती हैं।
- मेहनत करने के बावजूद व्यक्ति को पहचान मिलने में समस्याएं आती हैं।
- बॉस, वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद हो सकता है।
- पिता के साथ विचारों में मतभेद होने की संभावना होती है।
- आत्मविश्वास में कमी आ सकती है, जिससे फैसले लेने में समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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राहु महादशा अंतर्दशा अवधि
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अंतर्दशा ग्रह |
अवधि |
प्रभाव |
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राहु में राहु |
2 साल 8 महीने |
अचानक बदलाव, नए अवसर, विदेश से जुड़े मौके |
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राहु में चंद्रमा |
1 साल 6 महीने |
भावनात्मक बदलाव, परिवार का साथ, यात्रा के योग |
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राहु में मंगल |
1 साल |
काम में तेजी, साहस, नए काम की शुरुआत |
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राहु में सूर्य |
10 महीने |
करियर में तरक्की, मान-सम्मान, पिता का सहयोग |
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राहु में बृहस्पति |
2 सा 4 महीने |
करियर में प्रगति, धन लाभ, परिवार का सहयोग |
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राहु में शनि |
2 साल 10 महीने |
मेहनत का फल, जिम्मेदारियां बढ़ना, नौकरी में स्थिरता |
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राहु में बुध |
2 साल 3 महीने |
व्यापार में लाभ, नई संभावनाएं, संपर्क बढ़ना |
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राहु में केतु |
1 साल 1 महीने |
मन में बदलाव, आध्यात्मिक रुचि, पुरानी चीजों से दूरी |
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राहु में शुक्र |
3 साल |
सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी, प्रेम में प्रगति, आर्थिक लाभ |
राहु की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा और उनके फल
1. राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा
वैदिक ज्योतिष में सूर्य और राहु शत्रु ग्रह माने जाते हैं इसलिए इस अवधि का प्रभाव काफी हद तक सूर्य ग्रहण या चुनौतीपूर्ण वाला होता है। इस अवधि में शत्रुओं से तनाव, आंखों में कष्ट, पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता और शासन-प्रशासन से डर की स्थिति बन सकती है।
2. राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा
राहु चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं, ऐसे में इस दौरान जातक के जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यह अवधि अत्यधिक मानसिक तनाव अवसाद, करीबी रिश्तों से अनबन और धन हानि की संकेत देता है।
3. राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा
राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा अंगारक योग जैसे परिणाम देते हैं क्योंकि राहु और मंगल दोनों के उग्र प्रकृति के ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में, इस दौरान अत्यधिक क्रोध, चोट-चपेट या दुर्घटना का डर और रक्तचाप जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
4. राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा
यह अवधि जातक के जीवन में अत्यधिक महत्वपूर्ण व उथल-पुथल वाली होती है। इस दौरान जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिलते है। मानसिक तनाव, डर, भ्रम या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं। हालांकि यदि राहु शुभ स्थिति में हो तो जातक को विदेश जाने का मौका भी मिलता है।
5. राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा
जैसा कि राहु को पापी ग्रह माना जाता है और वहीं बृहस्पति देवताओं के गुरु और ज्ञान के कारक होते हैं। ऐसे में राहु की महादशी में गुरु की अंतर्दशा का परिणाम मिला जुला मिलता है। इस दौरान जातक का झुकाव अध्यात्म गतिविधियों की तरफ अधिक होता है। अशुभ स्थिति में पेट संबंधी परेशानियां और पारिवारिक मतभेद होने की संभावना होती है।
6. राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा
यह अवधि जातकों के लिए मिली-जुली व अत्यधिक संघर्ष वाली हो सकती है। इस दौरान मानसिक व शारीरिक कष्ट, पारिवारिक कलह और कार्यक्षेत्र में बाधा उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है।
7. राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा
राहु की महादशा में सबसे शुभ अंतर्दशा बुध की ही मानी जाती है। इसमें व्यापार का विस्तार, नई पार्टनरशिप के मौके, धन लाभ, निवेश में लाभ और नए कार्य या विवाह के योग बनते हैं। इस दौरान जातकों को करियर में भी तरक्की मिलने की संभावना अधिक होती है।
8. राहु की महादशा में केतु की अंतर्दशा
यह अवधि बेहद चुनौतीपूर्ण और उतार-चढ़ाव वाली मानी जाती है। जैसा कि केतु को छाया ग्रह कहा जाता है इसलिए इस दौरान सिरदर्द, बुखार, शत्रुओं से परेशानी, बेवजह का डर और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।
9. राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा
यह अवधि भौतिक सुख, आकर्षण और विलासिता का समय माना जाता है। इस दौरान जातक को अधिकतर अच्छे परिणाम ही मिलते हैं। यदि शुक्र अनुकूल हों तो यह समय सुख-सुविधा, वाहन-भूमि प्राप्ति, दाम्पत्य सुख और भौतिक विलासिता की पूर्ति होती है।
राहु की महादशा में क्या करें और क्या न करें
राहु की महादशा में कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
राहु की महादशा में क्या करें
- राहु की महादशा के दौरान भगवान शिव की पूजा करें और नियमित रूप से शिव मंत्र का जाप करें।
- इस अवधि कोई बड़ा फैसला लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार करें।
- नई चीजें सीखने और अपने स्किल्स को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
- नियमित रूप से ध्यान व प्रार्थना करना चाहिए ताकि मन इधर-उधर न भटके।
- किसी पर गुस्सा व शत्रुता करने से बचना चाहिए।
- गरीब व जरूरतमंदों की मदद करना चाहिए।
राहु की महादशा में क्या न करें
- इस दौरान किसी के बहकावे में आकर जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए।
- धोखा, झूठ व गलत तरीके से पैसे कमाने से बचना चाहिए।
- बिना सोचे समझे व बिना जानकारी के पैसा नहीं निवेश करना चाहिए।
- बेवजह के झगड़ों में नहीं पड़ना चाहिए।
नशे व गलत आदतों में नहीं पड़ना चाहिए। - बेवजह के डर और भ्रम से बचना चाहिए।
राहु महादशा को शांत और मजबूत करने के उपाय
- ज्योतिषी की सलाह से हाथ की मध्यमा उंगली में लोहे का छल्ला पहनें।
- गरीबों व जरूरतमंदों को खाना कपड़ों का दान करें।
- राहु बीज मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः के मंत्र का जाप करें।
- नियमित रूप से छिन्नमस्ता स्तोत्रम 108 बार सुनें।
- शनिवार के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करें।
- इसके अलावा, चांदी का सिक्का हमेशा अपने पास रखें।
- हो सके तो गंगा स्नान जरूर करें या नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
अपनी राहु महादशा कैसे देखें?
अपनी कुंडली में राहु की महादशा कब शुरू होगी और कितने समय तक चलेगी, यह जानने के लिए आप एस्ट्रोटॉक की महादशा कैलकुलेटर पर जाकर चेक कर सकते हैं। इसमें आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म समय व जन्म स्थान जैसी जानकारी दर्ज कर पूरी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अन्य महादशा ग्रह
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु की परेशानी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर तय होती है।
ज्योतिष के अनुसार, राहु की महादशा में मुख्य रूप से रहस्यमयी बीमारियां, मानसिक तनाव और अज्ञात रोग होते हैं जिनका आसानी से पता नहीं चलता।
पौराणिक कथाओं और ज्योतिष के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा को राहु का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है।
हिंदू ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राहु की शांति और कृपा के लिए मुख्य रूप से मां दुर्गा और भगवान शिव की आराधना की जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु के मुख्य शत्रु ग्रह सूर्य, चंद्रमा और मंगल हैं।