राहु मंत्र

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राहु मंत्र: अर्थ, महत्व और लाभ

ज्योतिष में राहु सबसे खतरनाक ग्रहों में से एक है, फिर भी इसका अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। आमतौर पर राहु जातक के जीवन में बुरे परिणाम देने के लिए विख्यात है। इसके बावजूद राहु की अपनी विशेषता है। यदि किसी जातक के जीवन में यह शुभ स्थान पर हो, तो उसे जीवन में सफलता, लग्जरी और कई अन्य सुखद परिणाम मिल सकते हैं। ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह कहा गया है, जिसका अर्थ है कि अन्य ग्रहों की तरह इसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं है। इस रूप में होने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव सबसे भयावह हैं। हालांकि कुंडली में राहु के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए राहु मंत्र काम आते हैं।

ज्योतिषियों के अनुसार जातक के पूर्व कर्म खासकर पिछले जन्म के कर्म के अनुसार ही उसकी कुंडली में राहु मजबूत या कमजोर स्थिति में मौजूद होता है। अगर जातक ने अपने पिछले जन्म में अच्छे कर्म किए हैं, तो उसके ग्रह में राहु की स्थिति अच्छी होगी और उसके जीवन में घटने वाली घटनाएं सुखद होंगी। दरअसल, राहु जिस तरह पुराने जन्म के कर्म के अनुसार फल देता है, उसी तरह अच्छे कर्म पर वह जातक को वर्तमान जन्म में अच्छे परिणाम भी देता है।

जब कुंडली में राहु (Rahu) की दिशा-दशा अशुभ होती है तो जातक के लिए यह और भी दुखद हो जाता है, क्योंकि यह जातक के ग्रह में मौजूद अन्य ग्रह के साथ मिलकर जातक के लिए परेशानियां खड़ी करता है। उदाहरण के लिए शुक्र को प्रेम का ग्रह माना जाता है। इसलिए, किसी भी मामले में, यदि शुक्र पापी ग्रह राहु से प्रभावित हो रहा है, तो यह आपके प्रेम जीवन में समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। यही नहीं, आपका वैवाहिक जीवन में बिखर सकता है, प्रेमी युगलों के बीच अलगाव हो सकता है। जातक के जीवन में इसी तरह की अन्य बुरी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि जातक की कुंडली में राहु के हानिकारक प्रभावों को कम से कम किया जाए। हिंदू मान्यता के अनुसार, राहु अच्छे और बुरे के बीच भेदभाव नहीं कर सकता है, इसलिए यह धार्मिकता (धर्म) के मानकों के खिलाफ काम करता है। ऐसे में इस ग्रह के लिए सभी एक समान हैं।

राहु मंत्र

अन्य ग्रहों के साथ राहु

शत्रुता, रोग और ऋण राहु के प्रमुख गुण हैं। फिर भी जो लोग राहु के सकारात्मक पक्ष के प्रभाव में होते हैं, वे आत्मविश्वासी, बहादुर और निडर बनते हैं। राहु के सकारात्मक पक्ष की कामना हर कोई करता है और जिनकी कुंडली में राहु मजबूत स्थिति में होता है, उन्हें राहु के ये सभी गुण प्राप्त होते हैं। नियमित रूप से राहु मंत्रों का जाप करके कुंडली में राहु को मजबूत किया जा सकता है।

चूंकि राहु की अपनी कोई राशि नहीं है, इसलिए जातक की कुंडली में प्रत्येक ग्रह के स्वामी को प्रभावित करता है। यदि ग्रह के स्वामी के साथ राहु के अच्छे संबंध हैं, तो जातक को उसके सुखद परिणाम मिलते हैं। इसके विपरीत यदि ग्रह का स्वामी राहु का शत्रु है, तो जातक को इसके नकारात्मक परिणाम झेलने पड़ते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में बलवान होता है।

कुंडली में राहु शुक्र के साथ मिलने पर जातक को लालची बना देता है। इस वजह से वह अपने जीवन में गलत निर्णय लेने लगता है। जबकि राहु, गुरु के साथ मिलकर गुरु चांडाल योग बनाता है। इसी तरह राहु मंगल के साथ मिलकर जातक को गलत निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है। वह धूम्रपान, शराब आदि जैसी बुरी आदतों में पड़ जाता है।

वहीं दूसरी ओर यदि राहु शुभ बुध के साथ स्थित हो तो जातक के व्यवसाय में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यदि राहु बुध के साथ बुरी स्थिति में हो तो यह जातक के लिए अशुभ हो सकता है।

यदि राहु छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो या इन भावों के स्वामी के साथ संयोजन हो जाए, तब भी राहुल बुरे परिणाम ही देता है। वैसे तो राहु ज्ञान का भी प्रतीक है। लेकिन पाप ग्रहों की उपस्थिति में इस विशेषता का विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और यह जातक को मानसिक रूप से कमजोर बना सकता है।

इसी तरह कुंडली में और भी कई योग हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुंडली में राहु दोष पैदा हो सकता है। अशुभ राहु कभी भी जातकों के लिए अच्छा नहीं होता है। क्योंकि यह जातक के करियर, प्रेम जीवन आदि में बाधा उत्पन्न करता है। हालाँकि, राहु मंत्रों का पाठ करके राहु के हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सकता है।

कुंडली में महत्वपूर्ण राहु मंत्र

सभी नौ ग्रहों में से राहु को सबसे दुष्ट ग्रह कहा गया है। यह ग्रह नैतिक रूप से गलत चीजें जैसे झूठ बोलना, चोरी करना, जुआ खेलना आदि का प्रतीक है। लेकिन जब राहु शुभ स्थिति में होता है, तो जातक की विभिन्न भौतिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उसे बहुत प्रसिद्धि और भाग्य भी देता है। तो क्यों न हम राहु के सकारात्मक पक्ष को सामने लाएं? यहां बताए गए राहु मंत्रों का नित जाप करें।

1. राहु बीज मंत्र (rahu beej mantra)

यदि जातक अपने पिछले कर्म का बुरा फल वर्तमान जन्म में भोग रहा है, तो ऐसे में वह राहु बीज मंत्र (rahu beej mantra) का नियमित पाठ कर अपनी समस्याओं में कुछ कमी कर सकता है। इसके साथ ही जिनका विवाह नहीं हो रहा है, वे भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। कई लोग काले जादू के बुरे प्रभाव से डरते हैं। आप चाहें तो काले जादू के प्रभाव से बच सकते हैं। इसके लिए नियमित राहु बीज मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इस मंत्र का नित जाप करन से आपका मानसिक चक्र (psychic chakra) खुलता है जिससे आपकी मानिसक परेशानियां कम होती हैं।

राहु बीज मंत्र है:

|| ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ||

राहु बीज मंत्र के जाप के लाभ
  • राहु मंत्र (rahu mantra) का सबसे प्रसिद्ध लाभ यह है कि यह जातक को किसी भी प्रकार की बुरी आत्मा या नकारात्मक ऊर्जा से लड़ने में मदद करता है
  • राहु आपके कर्म का प्रतीक है। इसलिए यदि आपको लगता है कि आपने अतीत में बुरे कर्म किए हैं, तो राहु बीज मंत्र का पूरे श्रद्धाभाव से जप करें। आपके कर्मों का बुरा प्रभाव कम हो जाएगा।
  • राहु जातक को भौतिक सुख प्रदान करता है। इसलिए यदि आप नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करते हैं, तो आपमें कुछ भी हासिल करने की क्षमता बढ़ जाएगा।
  • राहु बीज मंत्र का जाप आपकी आभा को मजबूत बनाता है, क्योंकि यह आपको ब्रह्मांड में ऊर्जा से जोड़ता है।
  • यदि आप बुद्धिमानी से अपने शत्रुओं से लड़ना चाहते हैं तो राहु बीज मंत्र का जाप करें। यह आपके लिए बहुत उपयोगी होगा।
राहु बीज मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त के पश्चात
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें 108 बार
राहु बीज मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस तरफ मुख करके इस मंत्र का जाप करें दक्षिण पश्चिम
2. राहु शांति मंत्र (Rahu shanti mantra)

कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में तनाव या परेशानी नहीं चाहता है। लेकिन दुष्ट ग्रह के रूप में राहु जातक के जीवन में ज्यादातर समय परेशानियां लाता ही रहता है। ऐसी स्थिति में ग्रह को शांत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य के लिए राहु शांति मंत्र है। ज्योतिषियों का दावा है कि जो कोई भी दिन में केवल दो बार राहु शांति मंत्र का जाप करता है, उस पर शनि का प्रभाव कम होने लगता है।

राहु शांति मंत्र है:

|| ॐ राहवे देवाय शांतिम, राहवे कृपाए करोति

राहवे क्षमाए अभिलाषत्, ॐ राहवे नमो: नम: ||

अर्थ- हे भगवान राहु, मैं आपको नमन करता हूं। आप मेरे पापों को क्षमा करें और मुझे आशीर्वाद दें।

राहु शांति मंत्र के जाप के लाभ
  • राहु का अशुभ प्रभाव जातक के साथ लंबे समय तक रह सकता है। इससे जीवन में कई मुश्किलें आ सकती हैं। राहु के हानिकारक प्रभाव को शांत करने में राहु शांति मंत्र मदद करता है।
  • आपको बतो दें कि राहु भले भौतिकवाद के भगवान हैं, लेकिन उन्हें लालच से सख्त नफरत है। इसलिए जब भी आप राहु शांति मंत्र का जाप करें तो मन में किसी तरह का लालच ना पालें। तभी आपको मन चाहा फल प्राप्त होगा।
  • राहु शांति मंत्र का जाप करने से आपके सफलता के मार्ग में आने वाली सभी बाधाएं दूर होंगी और दुर्घटनाओं की आशंकाएं खत्म होंगी।
  • मंत्र का जाप करने से जातक सुरक्षित रहता है और सुखी जीवन व्यतीत करता है।
राहु शांति मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम सूर्यास्त पश्चात
इस मंत्र का जाप कितनी बारा करें 2 बार
राहु शांति मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस तरफ मुख करके इस मंत्र का जाप करें दक्षिण पश्चिम की ओर
3. राहु गायत्री मंत्र (Rahu gayatri mantra)

ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक ग्रह और भगवान के लिए एक गायत्री मंत्र है। ज्योतिष में गायत्री मंत्रों को ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने वाला माना जाता है। राहु गायत्री मंत्र का जाप करने से जातक को सरकार से उपकार, शत्रुओं पर विजय और राहु के कारण होने वाले रोगों में कमी आती है। यदि जातक काल सर्प दोष से जूझ रहा है तो राहु गायत्री मंत्र भी उपचारात्मक मंत्रों में से एक है।

राहु गायत्री मंत्र है:

|| ॐ नागध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ||

अर्थ- मैं उसको नमन करती हूं जिसके ध्वज में सांप है, जिसके हाथ में कमल है। कृपया मुझे बुद्धि दो और मेरे जीवन को प्रकाश से भर दो।

राहु गायत्री मंत्र के जाप के लाभ
  • ज्योतिषियों के अनुसार राहु गायत्री मंत्र का जाप करने से कई लाभ मिलते हैं। सबसे पहला तो यह कि यह कुंडली में राहु ग्रह के सभी अशुभ प्रभावों को दूर करता है।
  • राहु गायत्री मंत्र जातक के करियर को बेहतर करता है, प्रेम संबंध में सफलता मिलती है। इसके साथ ही जातक को कई बेहतर अवसर भी प्राप्त होते हैं।
  • यदि आप किसी प्रकार की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो राहु गायत्री मंत्र का जाप करने से उसके हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
  • राहु गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने से आपको अचानक धन की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही सफलता भी मिल सकती है।
  • त्वरित सफलता प्राप्त करने में राहु सौभाग्य के कारक के रूप में काम करता है।
राहु गायत्री मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात
इस मंत्र को जाप करने की संख्या 108 बार
राहु गायत्री मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस तरफ मुख करके इस मंत्र का जाप करें दक्षिण पश्चिम
4. राहु पौराणिक मंत्र (rahu puranic mantra)

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु ग्रह नकारात्मक रूप से स्थित होता है, तो यह जातक के जीवन में राहु दशा और अंतर्दशा ला सकता है। इन दोषों के कारण विकास की गति धीमी हो जाती है प्रेम जीवन में समस्याएं आती हैं, धन संचय में गिरावट आती है, आदि। यदि कुंडली में राहु की स्थिति नकारात्मक है, तो आप राहु को पुराणिक राहु मंत्र से शांत कर सकते हैं।

ये है पूर्ण राहु मंत्र:

|| ॐ अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम, सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम ||

अर्थ- अर्ध शरीर वाले महाशक्ति, जिसने चंद्रमा और सूर्य पर विजयी पाई और जो शरेनी के गर्भ से जन्मे, हे भगवन मैं आपको नमन करता हूं।

पौराणिक राहु मंत्र के जाप के लाभ
  • जातक की कुंडली में राहु की स्थिति नकारात्मक होने पर जातक को इसके दुष्प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। राहु मंत्र का जाप करने से इन दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
  • पुराण मंत्र जातक के जीवन से किसी भी प्रकार की बुरी आत्माओं को दूर भगाता है।
  • पौराणिक राहु मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को शरीर के सामान्य दर्द से राहत मिलती है।
  • राहु मंत्र का जाप करने से जातक को अपने करियर में सफल होने की प्रबल संभावनाएं मिलती हैं।
राहु पुराण मंत्र का जाप करने का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त पश्चात
इस मंत्र को जाप करने की संख्या 18 बार
राहु पुराण मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस तरफ मुख करके इस मंत्र का जाप करें दक्षिण-पश्चिम

राहु मंत्र का जाप कैसे करें

  • यदि राहु मंत्रों से शुरुआत करते हैं, तो रात में या सूर्यास्त के बाद राहु मंत्र का जाप करें। बेहतर रहेगा कि इस संबंध में पर्याप्त जानकारी के लिए ज्योतिषी से संपर्क करें।
  • शनिवार की रात को इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके लिए पहले रात के समय स्नान करके स्वच्छ हो जाएं। मंत्र उच्चारण करने से पहले अपने सामने काली या गायत्री यंत्र रख लें।
  • पूजा करते समय काली या गायत्री यंत्र पर नीले फूल और चंदन चढ़ाएं।
  • यदि आप राहु के लिए गायत्री मंत्र का जाप करने की योजना बना रहे हैं, तो आप दोपहर के समय इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
  • राहु मंत्रों का आमतौर पर 108 बार जाप किया जाता है। हालांकि कुछ मंत्र ऐसे हैं, जिन्हें 108 से कम बार जपना चाहिए।
  • सर्वोत्तम परिणामों के लिए, 40 दिनों की अवधि में राहु मंत्र का 18,000 बार जाप करें।

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