ऊँ मंत्र

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ऊँ मंत्र: अर्थ, महत्व और लाभ

ओम मंत्र (om mantra) में केवल एक ध्वनि नहीं बल्कि ब्रह्मांड की तरंग है। ओम को ब्रह्मांड में उत्पन्न होने वाली पहली ध्वनि कहा जाता है और इस प्रकार ओम का जाप करने से जातक को कई लाभ मिलते हैं। ओम शब्द का कोई अर्थ नहीं है। हमारा मतलब यह है कि हर दूसरे शब्द की तरह, जैसे फूल या पहाड़ आदि का एक अर्थ होता है, इस तरह शब्द ओम को किसी निश्चित परिभाषा के साथ नहीं जोड़ सकता है। "ओम" (ॐ) का अर्थ प्रत्येक के लिए अलग है। ज्योतिष में ओम मंत्र का जाप एक पवित्र अभ्यास है, जो शरीर और मन को ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करने में मदद करता है। ओम की ध्वनि को न केवल हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है, बल्कि जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म जैसे अन्य धर्मों में भी इसका प्रमुख स्थान है। इन धर्मों के अनुसार, ओम मंत्र ग्रह पर सभी व्यक्तियों को ब्रह्मांड या सर्वोच्च शक्ति से जोड़ता है जो इसका मार्गदर्शन करता है।

ओम मंत्र उत्पत्ति (Om mantra origin)

ओम की ध्वनि बिग बैंग से जुड़ी है। ज्योतिषियों के अनुसार, ओम की उत्पत्ति उस समय हुई थी, जब ब्रह्मांड वास्तविक रूप में आ रहा था। ज्योतिषी ओम को निर्माता की ध्वनि के रूप में उद्धृत करते हैं, जो तीन अक्षरों 'ए,' 'यू' और 'एम' से बना है। ओम की ध्वनि अन्य ध्वनियों से विशेष है। दरअसल, दो वस्तुओं के आपस में टकराने के बाद उत्पन्न होने वाली अन्य ध्वनियों के विपरीत, ओम, अपने आप कंपन उत्पन्न कर सकता है। ऐसा माना जाता है कि जब कोई व्यक्ति ओम मंत्र का गहराई से जप करता है, तो उसके शरीर से निकलने वाला कंपन आत्मा से जुड़ाव महसूस करता है और ब्रह्मांड के परे मौजूद एक शक्ति से भी जुड़ने का अहसास कराता है।

ऊँ मंत्र

(ॐ)- 'ए' 'यू' 'एम' कंपन का सार (Essence of ‘A’ ‘U’ ‘M’ Vibrations)

वैदिक ग्रंथों में ओम को ध्वनि और प्रतीक, दोनों के रूप में माना जाता है, जिसकी अपनी शक्तियां हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह जातक को ज्ञान प्रदान करता है और सही तरह से उच्चारण किए जाने पर, जातक अपने शरीर से आत्मा तक 'ओम' को महसूस कर सकता है।

ज्योतिष के अनुसार ॐ को अगर हम अंग्रेजी के तीन अक्षर ए यू एम के जरिए समझें, तो यह जीवन के 3 मूल सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करता है। ये तीनों सिद्धांत हैं निर्माण, संरक्षण और विनाश। जब कोई ओम मंत्र का जाप करता है, तो इनमें से प्रत्येक अक्षर जातक में कुछ न कुछ लाता है।

  • 'ए' मन की सचेत अवस्था जिसे जाग्रत कहा जाता है।
  • 'यू' मन की अचेतन अवस्था जिसे स्वप्न कहा जाता है।
  • 'म' इस बीच, गहरी या गहन नींद की अवस्था जिसे सुषुप्ति कहा जाता है।

अत्यंत भक्ति और शुद्ध हृदय के साथ ओम मंत्र का पाठ जातक को आध्यात्मिक सफर की ओर ले जा सकता है। ओम मंत्र का पाठ न केवल कई शारीरिक लाभ पहुंचाता है, बल्कि ब्रह्मांड के साथ अपनी चेतना को संरेखित करके तनाव और चिंताओं से हमें दूर ले जाता है। साथ ही मानसिक क्षमता को विस्तृत करता है। यही एकमात्र कारण है कि ओम ज्योतिष में कई मंत्रों की नींव रखता है।

ओम मंत्र का ज्योतिषीय महत्व (Astrological significance of chanting OM in hindi)

जैसा कि हमने कहा ओम मंत्र (om mantra) ज्योतिष में अन्य सभी मंत्रों, वेदों और कर्मों का सार है। अगर आप इस शब्द पर अध्ययन करते हैं तो आप पाएंगे कि ज्यादातर मंत्र ओम से ही शुरू होते हैं। ओम मंत्र को कभी-कभी भगवान शिव मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इसका जाप विवाह, मुंडन, देवताओं की पूजा करते समय और बहुत कुछ धार्मिक अनुष्ठानों और समारोहों में किया जाता है। अपने विचारों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए कभी-कभी ध्यान करते हुए ओम मंत्र का उच्चारण किया जाता है।

ज्योतिषियों के अनुसार, ओम मंत्र में आध्यात्मिक शक्तियां होती हैं जो जातक में ज्ञान की भावना को प्रज्वलित करती है। अपने व्यक्तित्व में सुधार करने के लिए या खुद को पूरी तरह से कायाकल्प करने के लिए ओम मंत्र का पाठ कोई भी कर सकता है। जीवन के गहरे अर्थ को समझने, शांति प्राप्त करने और अपने आप को भार से मुक्त करने के लिए इस मंत्र का पाठ कोई भी कर सकता है।

मंत्र का जाप कैसे करें (How to chant the OM mantra in hindi)

ज्योतिषियों का कहना है कि ओम को वैदिक ग्रंथों में प्रणव या ओंकारा के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ, प्रणव शब्द का अर्थ है जीवन का पालना, और ओंकारा शुरुआत के लिए खड़ा होना। एक शब्द या मंत्र के रूप में ओम की व्यापक अपेक्षाएं हैं क्योंकि इसे हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म जैसे कई धर्मों द्वारा स्वीकार किया गया है। इसे ध्यान या योग के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में भी अपनाया जाता है।

लाखों लोग विभिन्न लाभों के लिए ओम मंत्र का जाप करते हैं। हालांकि, जो सही तरीके से इसका जप करते हैं, केवल वही ओम मंत्र का सर्वोत्तम लाभ उठा सकते हैं। ज्योतिषी के अनुसार ओम मंत्र का जाप करने का सही तरीका यहां बताया जा रहा है-

मंत्र के जाप का सही तरीका (The correct way of chanting the OM mantra in hindi)
  • ओम मंत्र का उच्चारण शुरू करने के लिए, पहले अपनी आंखें बंद करें और सीधी मुद्रा में बैठ जाएं।
  • फिर धीरे-धीरे लंबी सांस लें। एक या दो सेकंड के लिए सांस को रोककर रखें। इसके बाद सांस छोड़ दें।
  • अगली सांस लेने के साथ, "ऊ" ध्वनि बनाना शुरू करें और इसे आधा ही उच्चारित करें।
  • अब सांस छोड़ते हुए अपने होठों को आपस में मिलाकर "मम्मम" की ध्वनि निकालें। जब तक आप कर सकते हैं तब तक इस ध्वनि को खींचे।

यह पहले ही उल्लेख किया जा चुका है कि ओम मंत्र का पाठ आपके शरीर में विभिन्न कंपन पैदा करता है, जो सिर से पैर तक पहुंचता है।

  • 'ए' एक ऐसा कंपन पैदा करता है जो पेट, छाती और रीढ़ की हड्डी के क्षेत्र में महसूस होता है।
  • अक्षर 'ऊ' का उच्चारण करने से " ओ" का कंपन उत्पन्न होता है। यह कंपन आपके सीने में गूंजता है, जो कि गले और शरीर के मध्य भाग में भी कंपन पैदा करता है।
  • अंत में, 'म' शब्द का जाप करने से नाक और मस्तिष्क क्षेत्र में "म्मम" की गुनगुनाहट होती है। कंपन शरीर के ऊपरी हिस्से को ठीक करने में मदद करता है।

इस तरह, ओम मंत्र (om mantra) की ब्रह्मांडीय ऊर्जा एक व्यक्ति के पूरे शरीर में गूंजती है। यह मंत्र आपके जीवन में सकारात्मकता लाता है और आपको अंदर से तरोताजा होने का अहसास कराता है।

ओम मंत्र जाप के लाभ (Om Chanting benefits in hindi)

जैसा कि पहले ही कहा गया है कि ओम केवल ध्वनि नहीं बल्कि ईश्वर की ध्वनि है। ओम सर्वोच्च होने का प्रतीक है और इस प्रकार इसका पाठ करने से उपासक को बेहतर स्वास्थ्य से लेकर मानसिक लाभ तक प्राप्त होते हैं। वैदिक ग्रंथों और कई ज्योतिषियों के अनुसार, ओम जप के कुछ सबसे उल्लेखनीय लाभ यहां दिए गए हैं-

  • ओम मंत्र (om mantra) का जाप करने का सबसे अच्छा लाभ पर्यावरण शुद्धि है। मंत्र आपके आस-पास के वातावरण को शुद्ध करता है ताकि आप अपने लिए सकारात्मक वातावरण बना सकें।
  • ओम शब्द का भक्तिभाव के साथ उच्चारा करने से ब्रह्मांड के साथ बंधन स्थापित होता है। इस प्रकार आपमें सकारात्मक ऊर्जा प्रविष्ट करती है।
  • ओम मंत्र का जाप करने से आपको बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  • जैसा कि कहा जाता है कि ओम मंत्र में आत्म-उपचार शक्तियां होती हैं, मंत्र न केवल आपको ऊर्जा देता है बल्कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार करता है।
  • ओम मंत्र के जाप से जातक के स्वर-रज्जु में कंपन उत्पन्न होता है। कंपन वायुमार्ग को साफ करने के लिए साइनस को खोलते हैं।
  • ओम मंत्र के जाप से जातक ध्यान की स्थिति में आ जाता है, जिससे मन, शरीर और आत्मा को विश्राम मिलता है।
  • ओम मंत्र (om mantra) के जाप से न केवल इसका जाप करने वाले को बल्कि उसके आसपास के लोगों को भी लाभ होता है, क्योंकि कंपन सभी दिशाओं में प्रवाहित होता है।
  • जब आप ओम मंत्र का जाप करते हैं, तो आप विश्राम की स्थिति में प्रवेश करते हैं। इससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है, रक्तचाप धीमा होता है।
  • अगर आप अपने मन को मजबूत करना चाहते हैं तो ओम का जाप एक अच्छा व्यायाम सरीखा है। यह आपके स्वर तंत्री (वोकल कॉर्ड) के आसपास की मांसपेशियों को बेहतर बनाता है। वृद्धावस्था में आपको स्वर तंत्री संबंधी समस्या की आशंका कम हो जाती है।
  • ज्योतिषियों का सुझाव है कि ओम मंत्र का जाप करते समय जातक को अपने दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़ना चाहिए। हथेली में आई गर्माहट को आंखों सहित शरीर के विभिन्न भागों पर रखना चाहिए। ऐसा करने से शरीर के अंग सुचारू रूप से काम करते हैं और सक्रिय भी रहते हैं।
  • मंत्र का जाप करके आप अपनी भावनाओं पर दृढ़ नियंत्रण बनाने में सक्षम होते हैं। इससे जातक को अपनी भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। यह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए है जिसे क्रोध की समस्या है या वह आसानी से चिढ़ जाता है।
  • ओम मंत्र (om mantra) का नियमित जाप आपकी आध्यात्मिक यात्रा को अधिक खुशी और सकारात्मकता की ओर ले जाता है। हालांकि, यह केवल उन लोगों के लिए होगा, जो सही तकनीकों के साथ नियमित रूप से लंबे समय तक मंत्र का जाप करते हैं।
  • ओम मंत्र का जाप समूह में किया जाना चाहिए। इसकाे उच्चारण करने का यह सबसे अच्छा तरीका है। जब समूह में मंत्र का जाप किया जाता है, तो इसका प्रभाव बढ़ जाता है। इससे अत्यधिक सकारात्मक स्पंदन उत्पन्न होता है।
  • आप यह मानें या ना मानं, ज्योतिषियों का मानना है कि नियमित रूप से ओम मंत्र का जाप करने से त्वचा संबंधी समस्याएं कम होती हैं। क्योंकि ओम के जाप से त्वचा स्वच्छ और परिष्कृत होती है। दरअसल, मंत्र जाप से जातक में जो आंतरिक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, वह त्वचा को विशेष चमक प्रदान करती है।
  • ओम मंत्र का जाप करने का एक और स्वास्थ्य लाभ यह है कि इससे ‘आ’ की कंपन ध्वनि उत्पन्न होती है। यह ध्वनि रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में मददगार है।
  • ध्वनि 'ऊ' स्वरतंत्री द्वारा निर्मित होती है, जो थायरॉयड ग्रंथियों को लाभ पहुंचाती है।
  • ज्योतिषियों का सुझाव है कि आध्यात्मक की दृष्टि से अगर ओम मंत्र का जाप किया जाए, तो आंखों की रोशनी में सुधार होना शुरू हो जाता है, जिसकी ईमानदारी से आज हम सभी को आवश्यकता है।

यदि आप ओम मंत्र के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो आप हमारे ज्योतिषियों से बात कर सकते हैं।

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