चन्द्र मंत्र

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चंद्र मंत्र: अर्थ, लाभ और जप करने के तरीके

ज्योतिष में चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है। चंद्र का अर्थ संस्कृत में "उज्ज्वल और चमकदार" है। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का व्यक्ति के मनोविज्ञान, भावनाओं और दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। हमारी इच्छाएं, बुनियादी व्यवहार और अवचेतन मन यानी सभी चंद्रमा द्वारा प्रतिनिधित्व करते हैं।

चंद्रमा समग्र रूप से मातृत्व और स्त्री शक्ति से जुड़ा हुआ है। यह हमारे भीतर के बच्चे और मातृत्व दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। यह संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और विचारशील है। चंद्रमा हमारे सहज और तात्कालिक आवेगों का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ ही सूर्य के संकेतों को नियोजित करने वाले पश्चिमी ज्योतिष के विपरीत हम चंद्र सौर चक्र का उपयोग करते हैं और हिंदू वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि से जाते हैं।

भगवान चंद्र को चंद्रमा भगवान के रूप में भी जाना जाता है। वह हर किसी की कुंडली के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रह हैं। मानव मन का शासक चंद्र या सोम है, जो ग्रह का अधिष्ठाता देवता है। किसी व्यक्ति की कुंडली पर चंद्रमा का प्रभाव कई तरह के अनुकूल और प्रतिकूल परिणाम दे सकता है।

चन्द्र मंत्र

चंद्र मंत्र: वे कैसे मदद करते हैं?

चंद्र मंत्र (chandra mantra) एक शक्तिशाली कहानी है जो लोगों की चंद्रमा से जुड़ने में मदद कर सकती है। इस मंत्र के उच्चारण से आध्यात्मि रूप में भगवान चंद्रमा से जुड़ने में मदद मिलती है। ऐसे कई चंद्र मंत्र हैं, जिनका बार-बार उच्चारण करने से व्यक्ति का जीवन समृद्ध और सुखद हो सकता है।

चंद्र मंत्र का जाप करने से परेशान व्यक्ति के दुख कम हो सकते हैं। ऐसा उस व्यक्ति की कुंडली में भगवान चंद्रमा की स्थिति के कारण भी हो सकता है। इससे उसकी जिंदगी में सुखद और प्रभावशाली असर देखने को भी मिलता है।

चंद्र मंत्र का जाप कैसे करें

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान चंद्र को प्रसन्न करने और सुखी तथा समृद्ध जीवन पाने के लिए, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका चंद्र मंत्र का जाप करना है। यदि सही ढंग से चंद्र मंत्र का जाप और अभ्यास किया जाए, तो चंद्रमा मंत्र किसी के भी जीवन में समृद्धि ला सकता है।

  • सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान करें। भगवान चंद्र के चित्र के सामने चंद्र मंत्र का जाप करें। मंत्र का अधिकतम लाभ उठाने के लिए जानें कि इसका क्या अर्थ है।
  • शुक्ल पक्ष का सोमवार चंद्र मंत्र को दोहराने के लिए सबसे अच्छा दिन है।
  • अधिक लाभ के लिए चंद्र मंत्र का 18 माला या 18x108 बार जप करना अच्छा होता है।
  • चंद्र मंत्र के उच्चारण से जो कंपन उत्पन्न होती है, वह चंद्रमा की स्थिति के प्रतिकूल प्रभावों पर प्रतिक्रिया करती है।
  • मानव मन का देवता, चंद्रमा है। चंद्र मंत्र का जाप मन की जटिलता को स्पष्ट करने और मानसिक शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है।
  • भगवान चंद्र आपकी उपस्थिति, बुद्धि, दृष्टि, स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमताओं को बेहतर बनाने में आपकी सहायता करते हैं। इन मंत्रों का जाप इन गुणों को बेहतर बनाता है।
  • चंद्र मंत्र का रोजाना जाप करने से जीवन से बुरे पहलुओं का प्रभाव कम होता है और चंद्रमा के ज्योतिष चार्ट के अच्छे पहलुओं के बढ़ने में मदद मिल सकती है।

महत्वपूर्ण चंद्र मंत्र ( Important chandra mantra)

1. चंद्र बीज मंत्र (chandra beej mantra)

बीज मंत्र गहन कथनों का संग्रह है जो हमारे जीवन में ग्रहों के हानिकारक प्रभावों को कम करने में सहायता करते हैं। इनका प्रभाव वैदिक मंत्रों से अधिक होता है। चंद्र बीज मंत्र के नियमित उच्चारण से चंद्रमा के साथ बहुत गहरा रिश्ता विकसित हो जाता है। लेकिन जातक को यह ध्यान रखना चाहिए जब भी इस बीज मंत्र का उच्चारण किया जाए, तब मन में सिर्फ चंद्रमा भगवान का ध्यान होना चाहिए। इस चंद्र मंत्र का शांत वातावरण में जप करना चाहिए।

चंद्र बीज मंत्र हैं:

|| ॐ सों सोमाय नम: ||

॥ ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम: ॥

अर्थ - दुग्ध सागर मंथन के समय जन्म।

चंद्र बीज मंत्र के जाप के लाभ
  • चंद्र बीज मंत्र का जप करने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि जातक सोचने की क्षमता बेहतर होती है और सोचने की प्रक्रिया में सकारत्मकता झलकती है।
  • इस मंत्र की वजह से भावनाएं भी नियंत्रण में रहती हैं।
  • इससे बेहतर अंतर्ज्ञान शक्ति प्राप्त होती है और रचनात्मकता के प्रति रुझान बढ़ता है।
  • इसके अलावा इस चंद्र मंत्र के लाभ के रूप में जातक का कविता, संगीत आदि के प्रति प्रेम बढ़ता है।
  • इस मंत्र का जाप करने से इसका प्रभाव आपकी भावनाओं पर दिखता है। इससे आप अधिक संवेदनशील बनते हैं और अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।
चंद्र बीज मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समय पूर्णिमा की रात
इस मंत्र का कितनी बार जाप करें 18×108 बार
चंद्र बीज मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस ओर मुख करके जाप करें उत्तर पश्चिम दिशा
2. चंद्र ध्यान मंत्र (chandra dhyan mantra)

चंद्र ध्यान मंत्र, चंद्र देव का विवरण देता है। इसमें रंग, प्रकृति, हथियारों की संख्या, मुद्राएं आदि शामिल हैं। जो लोग चंद्र ध्यान मंत्र का जाप करते हैं, वे चंद्र भगवान से जुड़ने की मनोकामना करते हैं। भगवान चंद्र से वे प्रार्थना करते हैं उन्हें सफल जीवन दें, शांति प्रदान करें और आध्यात्मिकता का मार्ग प्रशस्त करें। यह मंत्र जिंदगी के प्रति हमारा फोकस बढ़ाने में मदद करता है, अशावादी बनाता है और अस्थिर मन को स्थिर करने में भी महति भूमिका का निर्वहन करता है।

चंद्र ध्यान मंत्र है:

।। श्वेतांबरः श्वेता विभूषणस्चा श्वेता धुयातिर दंडाधारो द्विबाहुहु चंद्रो मृत्युत्मा वरदः किरीती माई प्रसादम् विधातु देव:।।

अर्थ - चंद्रदेव श्वेत वर्ण के हैं, श्वेत वस्त्र धारण करते हैं तथा श्वेत वर्ण के आभूषणों से सुशोभित हैं। चंद्र देव मुझमें आत्मविश्वास जगाएं और मेरे जीवन को रोशन करें।

चंद्र ध्यान मंत्र के जाप के लाभ
  • चंद्र ध्यान मंत्र (chandra dhyan mantra) का जाप करने से जातकों को आत्म-जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • इस चंद्र मंत्र का पाठ करने से जीवन के प्रति दृष्टिकोण अधिक सकारात्मक होता है तथा विपरीत परिस्थितियों से निपटने की समझ विकसित होती है।
  • इसके अलावा, यह मंत्र थकान को दूर कर ऊर्जावान बनाने में सक्षम है।
  • इस मंत्र के माध्यम से श्वास की गति पर बेहतर नियंत्रण होता है, अपने अंतर्मन की शांति को महसूस किया जाता है और भावनाओं पर नियंत्रण प्राप्त होता हैं।
चंद्र ध्यान मंत्र के जाप करने के लिए सर्वोत्तम समय शुक्ल पक्ष सोमवार
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें 18×108
चंद्र ध्यान मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस ओर मुख करके जाप करें चन्द्र यंत्र
3. चंद्र गायत्री मंत्र (chandra gayatri mantra)

सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए लोगों को चंद्र गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में भगवान चंद्रमा को प्रसन्न करने के लिए यह सबसे मजबूत मंत्रों में से एक है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्र गायत्री मंत्र लोगों को एक सुंदर आत्मा, मन और स्वस्थ शरीर प्राप्त करने में मदद करता है। जब लोग इस मंत्र का जाप करते हैं, तो वे भगवान चंद्रमा के करीब आते हैं और उनसे बेहतर जुड़ाव महसूस करते हैं। साथ ही, उन्हें जीवन की बाधाओं को बेहतर का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। कठिन परिस्थितियों या विकट समय में चंद्र गायत्री मंत्र का जाप करने से भगवान चंद्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे हमारे जीवन से नकारात्मकता दूर होती है, मन तनाव मुक्त होता है और ध्यान केंद्रित मरने में सफलता मिलती है। इस मंत्र के जाप की शुरुआत पूर्ण ध्यान के साथ सोमवार को की जानी चाहिए।

चंद्र गायत्री मंत्र है:

|| ॐ पद्मद्वाजय विद्महे हेमा रूपाय धीमहि तन्नो चंद्र: प्रचोदयात् ||

अर्थ - मैं कमल ध्वज धारण करने वाले चंद्रमा भगवान के सामने नतमस्तक हूं। वह एक सोने के रंग भांति चमकदार हैं। चंद्र देव मेरे मन को प्रबुद्ध करें और मेरा मार्ग रोशन करें।

चंद्र गायत्री मंत्र के जाप के लाभ
  • चंद्र गायत्री मंत्र जप करने से लोगों में भय कम होता है और विपरीत परिस्थितियों से मजबूती से निपटते हैं।
  • वे सभी कार्यों में सफल होते हैं, प्रगति प्राप्त होती। साथ ही मन शांति होता है।
  • चंद्र देव के आशीर्वाद से शांतिपूर्ण मन और निरोग काया प्राप्त होती है।
  • अपनी भावनाओं को समझने में मदद मिलती है। संवदेनशीलता बढ़ती है।
  • मंत्र जाप से मानसिक परेशानियां कम होती हैं, मन को राहत मिलती है।
  • इस मंत्र जाप से चर्म रोग है से छुटकारा मिलता है।
चंद्र गायत्री मंत्र के जाप करने का सर्वोत्तम समय शुक्ल पक्ष सोमवार
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें दिन में 3, 7, 9, 108, व 1008 बार
चंद्र गायत्री मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस ओर मुख करके जाप करें पूर्व दिशा
4. चंद्र नवग्रह शांति मंत्र (chandra navagraha shanti mantra)

यह भक्ति प्रकाश का प्रतीक है। यह मंत्र आमतौर पर लोगों को जीवन की समस्याओं और बाधाओं को दूर करता है और उनके मन को शांत रखने में मदद करता है। नवग्रह चंद्र शांति मंत्र मूल रूप से नैतिकता और भावनाओं के संदर्भ में जातक को एक स्पष्ट विचार प्रदान करता है। इससे उनमें आत्मविश्वास की वृद्धि होती है और अन्य मनुष्यों के लिए भी प्रेरक बनते हैं और इसका प्रचार करते हैं। इस मंत्र का जप करने से जातक अपनी सुखद भावनाओं का अहसास करता है और इससे उसका स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। चंद्र देव की कृपा से लोग आंत, पेट आदि से संबंधित रोगों से मुक्त हो जाते देते हैं। इसके अलावा, यदि कोई नियमित रूप से नवग्रह चंद्र शांति मंत्र का जाप करता है, तो वह भावनात्मक परेशानी से दूर हो जाता है।

चंद्र नवग्रह मंत्र है:

|| दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम्॥

अर्थ - मैं उस चंद्र देव को प्रणाम करता हूँ, जिनका रंग दही और शंख जैसा सफेद है। मैं उन्हें नमन करता हूं जो दूधिया सागर से निकला है और जो अमृत के रूप में शिव की शिखा को सुशोभित करता है।

चंद्र नवग्रह शांति मंत्र के जाप के लाभ
  • चंद्र नवग्रह शांति मंत्र (chandra navagraha shanti mantra) व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा ग्रह के अशुभ प्रभावों को दूर करने में मदद करता है।
  • दुर्भाग्य को दूर रखते हुए यह चंद्र मंत्र जातक के जीवन में सुख-शांति को बढ़ावा देता है।
  • त्वचा और आंत से संबंधित रोग तथा व्याधी इस मंत्र से दूर हो जाते हैं।
  • यह मंत्र चंद्रमा के बुरे प्रभावों को शांत करता है और लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करता है तथा सकारात्मकता तथा आशावाद की ओर ले जाता है।
चंद्र नवग्रह शांति मंत्र का जाप करने के लिए सर्वोत्तम समय पूर्णिमा की रात
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें 54 व 108 बार
चंद्र नवग्रह शांति मंत्र का जाप कौन कर सकता हैं? कोई भी
किस ओर मुख करके जाप करें उत्तर पश्चिम

अन्य शक्तिशाली चंद्र मंत्र

1. चंद्र नमस्कार मंत्र (chandra namaskar mantra)

जीवन में चंद्र ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए लोग चंद्र नमस्कार मंत्र का जाप करते हैं। योग शास्त्र के अनुसार, इस नमस्कार को करने से व्यक्ति को सौंदर्य, दीर्घायु और यौवन की प्राप्ति होती है। जातक को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, आंनमदय जीवन यापन करते हैं। इसके साथ ही मन स्वस्थ रहता है और शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। इस मंत्र के माध्यम से जातक की रचनात्मकता बढ़ती है और बुद्धि विस्तृत होती है। चंद्र नमस्कार में 14 आसन होते हैं, जो शरीर के प्रत्येक भाग को ऊर्जावान बनाते हैं। यह लोगों को मिलनसार भी बनाता है, जिससे आपसी एकता को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, यह चंद्रमा के चक्र के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

चंद्र नमस्कार मंत्र हैं:

ॐ कामेश्वर्यै नमः।

अर्थ - मनोकामना पूर्ण करने वाले को प्रणाम

ॐ भागमालिन्यै नमः।

अर्थ - समृद्धि की माला धारण करने वाले को प्रणाम

ॐ नित्यक्लिन्नयै नमः।

अर्थ - सदा करुणामयी को प्रणाम

ॐ भेरुण्डायै नमः।

अर्थ - जो क्रूर है उसे नमस्कार

ॐ वाह्निवासिन्यै नमः।

अर्थ - अग्नि में निवास करने वाले को नमस्कार

ॐ वज्रेश्वरयै नमः।

अर्थ - वज्र धारण करने वाले को नमस्कार।

ॐ दूत्यै नमः।

अर्थ - जिसका दूत शिव है उसे नमस्कार।

ॐ त्वरितायै नमः।

अर्थ - जो तेज है उसे नमस्कार।

ॐ कुलसुन्दर्यै नम:।

अर्थ - गुणी, आदरणीय और आकर्षक व्यक्ति को नमस्कार।

ॐ नित्यायै नमः।

अर्थ - जो शाश्वत है उसे नमस्कार।

ॐ नीलपताकिन्यै नम:।

अर्थ - नीले झंडे से सुशोभित व्यक्ति को नमस्कार।

ॐ विजयायै नमः।

अर्थ - सदा विजयी रहने वाले को प्रणाम।

ॐ सर्वमंगलायै नमः।

अर्थ - सभी सौभाग्यों के स्रोत को नमस्कार।

ॐ ज्वालामलिन्यै नमः।

अर्थ - उस व्यक्ति को नमस्कार जो तत्काल ज्वाला से घिरा हुआ है।

चंद्र नमस्कार मंत्र के जाप के लाभ
  • इस चंद्र मंत्र के रूप् में लोगों की जिंदगी बहुत ही सुंदर हो जाती है। उनकी मानसिक शक्ति बढ़ती है और वे स्वभाव से जिम्मेदार बनते हैं।
  • उनके जीवनशैली लचीली होती है और किसी बदलाव की स्वीकारोक्ति के लिए तैयार रहते हैं।
  • ये अपने कार्य प्रदर्शन को बेहतर करते हैं और वे खुद में बेहतर ऊर्जा को संचालित करने में सक्षम होते हैं।
  • इस मंत्र जाप की मदद से त्वचा संबंधी रोग से छुटकारा मिलता है और आन्तरिक सौन्दर्य तथा आत्म-जागरूकता होती है।
चंद्र नमस्कार मंत्र का जाप करने के लिए सर्वोत्तम समय शाम के समय
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें एक बार में 4 से 5 बार
चंद्र नमस्कार मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस ओर मुख करके जाप करें उत्तर पश्चिमी
2. चंद्र दोष निवारण मंत्र (chandra dosh nivaran mantra)

चंद्र दोष तब होता है जब जन्म के समय चंद्रमा ग्रह सत्तारूढ़ नक्षत्र के बिल्कुल करीब आ जाता है। इसके अलावा, जब चंद्र महादशा में चंद्रमा बीमार या कमजोर होता है तो लोगों को कई बाधाओं और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब लोगों को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो यह कुंडली में चंद्र दोष के प्रभावों को दर्शाता है। इसके अलावा धन, स्वास्थ्य और भावनाओं के संबंध में समस्याएं हो सकती हैं, जो लोगों को अपने निजी जीवन में कष्टों से गुजरती हैं। उसी के लिए चंद्र दोष निवारण मंत्र है।

चंद्र दोष निवारण मंत्र है:

|| दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम्॥

अर्थ - गौरवशाली चंद्र देव की उत्पत्ति देवताओं और राक्षसों द्वारा दूध के समुद्र के मंथन से हुई थी जो अमरता का अमृत चाहते थे। यह शीतल ग्रह भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। चंद्रदेव का रंग बर्फ, दही और शंख जैसा है।

चंद्र दोष निवारण मंत्र के जाप के लाभ
  • यदि किसी की कुंडली में चंद्र दोष है, तो इस मंत्र का नियमित जाप करने से जातक के जीवन की बाधाएं और अन्य परेशानियां दूर हो जाती हैं।
  • इसके अलावा, यदि आपका चंद्रमा कमजोर है या ग्रह किसी पाप ग्रह के प्रभाव में है, तो इस चंद्र मंत्र को उपाय के रूप में जप करने से बुरे प्रभावों को दूर किया जा सकता है।
  • इसके अलावा, चंद्र दोष मंत्र चंद्रमा को मजबूत बनाने और व्यक्ति के क्रोध और आक्रामकता को शांत करने में भी मदद करता है।
  • यह आपको आंतरिक शांति प्राप्त करने, अपने जीवन का बेहतर और अधिक गहन मूल्यांकन करने में भी मदद करता है।
चंद्र दोष निवारण मंत्र का जाप करने के लिए सर्वोत्तम समय शुक्ल पक्ष का सोमवार
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें 18×108 बार
चंद्र दोष निवारण मंत्र का जाप कौन कर सकता है? कोई भी
किस ओर मुख करके जाप करें उत्तर पश्चिमी
3. गणेश चतुर्थी के लिए चंद्र मंत्र

चंद्रमा के लिए गणेश चतुर्थी पर इस मंत्र का जाप किया जाता है। हालांकि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना सख्त मना होता है, क्योंकि इसे अशुभता से जोड़ा गया है। माना जाता है जो व्यक्ति इस दिन चंद्रमा के दर्शन करता है, उसके जीवन में अप्रत्याशित बुरी घटनाएं घटती हैं। कथाओं के अनुसार, चतुर्थी पर गणेश जन्मोत्सव के दौरान चंद्रमा ने उनके हाथी रूपी मुख और मोटे उदर का मजाक उड़ाया था। चंद्रमा के इस व्यवहार से गणेश और पार्वती दोनों बेहद क्रोधित हो उठे थे।

उस समय गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप देते हुए कहा कि वह हमेशा अंधेरे में रहेंगे। हालांकि चंद्र के पश्चाताप और अन्य देवताओं द्वारा की गई प्रार्थना से गणेश भगवान का क्रोध कुछ शांत हुआ और उन्होंने श्राप को आशिंक रूप से मिटा दिया था। ऐसा कहा जाता है कि जो कोई भी चतुर्थी पर चंद्रमा को देखता है, उसकी निंदा की जाती है और वह मिथ्या दोष से पीड़ित होता है। यदि किसी ने चतुर्थी को चंद्रमा देखा है, तो मिथ्या दोष होने पर चंद्र दर्शन मंत्र का पाठ किया जाना चाहिए।

गणेश चतुर्थी के लिए चंद्र मंत्र है:

।। सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ।।

अर्थ - सिंह ने प्रसेन (सत्रजीत के भाई और भगवान कृष्ण के चाचा ससुर-सत्यभामा के चाचा) को और जाम्बवान ने सिंह की हत्या कर दी अब तुम मत रोओ, इस स्यामंतक मणि पर तुम्हारा अधिकार है।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र मंत्र जाप के लाभ
  • यदि आप गणेश चतुर्थी पर चंद्र मंत्र का जाप करने से चंद्रमा के दुष्प्रभाव से छुटकारा मिलता है।
  • इसके अलावा, यह आपको उन परेशानियों और मुद्दों से बचाता है जो एक चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से आप पर पड़ते हैं। यही नहीं, इस मंत्र जाप की मदद से आप बीमारियों से दूर रहते हैं, अपने क्रोध पर नियंत्रण कर पाते हैं, ऊर्जावान और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। साथ ही दूसरों के प्रति आपका सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रहता है।
  • इस चंद्र मंत्र का जाप करने का एक और लाभ यह है कि आपका चंद्रमा मजबूत हो जाएगा और मिथ्या दोष का कोई भी नकारात्मक प्रभाव भी नहीं रहेगा।
  • मानसिक परेशानी जैसे भ्रम, तनाव आदि भी दूर हो जाएंगे।
गणेश चतुर्थी पर चंद्र मंत्र जाप करने का सर्वोत्तम समय गणेश चतुर्थी
इस मंत्र का जाप कितनी बार करें 108 बार
गणेश चतुर्थी पर चंद्र मंत्र जप कौन कर सकता है? जो जातक चंद्र देखते हैं
किस ओर मुख करके जाप करें उत्तर पश्चिमी

चंद्र मंत्र जाप के समग्र लाभ

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र मंत्र के कई लाभ हैं। यहां बताया गया है कि पाठ करने वालों के लिए चंद्र मंत्र किस प्रकार सहायक सिद्ध हो सकता है।

  • इस चंद्र मंत्र का जाप करने से चिंता खत्म होती है, वर्तमान समय की परेशानियां नष्ट होती हैं और मानसिक शांति की बढ़ोतरी कर सकारात्मक ऊर्जा का वितरण करने में मदद करती है।
  • यह समृद्धि के साथ-साथ मजबूत मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
  • यह व्यक्ति को स्वस्थ और मस्तिष्क को शांत करने में सहायता करता है।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दोस्तों और सहकर्मियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने में भी उपयोगी है।
  • यह व्यक्ति में आत्म-आश्वासन और आत्मविश्वास को बढ़ाने में लाभकारी है।
  • चंद्र मंत्र निश्चित रूप से आपकी सहज शक्तियों को जगाने में आपकी सहायता कर सकता है। यह आपके आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने में भी आपकी मदद करता है।
  • अगर आप एक तुनमिजाती व्यक्ति हैं, तो चंद्र मंत्र की मदद से अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर इस तरह के व्यवहार को संतुलित कर सकते हैं। इससे आप आशावान भी बनेंगे।
  • यह मंत्र आपको संवेदनशील मसलों को सुलझाने और विपरीत परिस्थितियों से निपटने में भी मदद करेंगे।

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