19 वर्षों का यह दौर सिखाता है अनुशासन, धैर्य और अटूट सफलता की राह
सौरमंडल का छठा और बृहस्पति के बाद दूसरा सबसे बड़ा ग्रह शनि ग्रह है, जिसे एक क्रूर ग्रह माना जाता है। शनि ग्रह का नाम सुनते ही हर किसी के मन में डर पैदा हो जाता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में शनि कोई डरावने देवता नहीं बल्कि कर्म फलदाता और न्याय के देवता हैं। शनि महादशा की बात करें तो यह जातक के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इस महादशा की कुल अवधि 19 साल होती है। ज्योतिष में शनि को कर्म, मेहनत, अनुशासन, नौकरी और जिम्मेदारियों का कारक माना जाता है।
ऐसे में, शनि की महादशा व्यक्ति को मेहनत करने और अपने कर्मों का फल पाने का मौका देती है। अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि शनि की महादशा कैसी होती है और इस दौरान व्यक्ति के जीवन में क्या बदलाव आते हैं। तो बता दें कि शनि की महादशा का परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि शनि आपकी जन्मकुंडली में किस राशि, भाव और स्थिति में विराजमान हैं।
एस्ट्रोटॉक के इस लेख में हम आपको शनि की महादशा के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे। साथ ही, शनि की महादशा के प्रभाव, उपाय, क्या करें, क्या न करें आदि के बारे में भी बताएंगे।
शुक्र की महादशा के बाद शनि की महादशा सबसे लंबी महादशा होती है, जो 19 वर्षों तक चलती है। इसे जीवन में मेहनत, जिम्मेदारी और धैर्य से जोड़कर देखा जाता है। जैसा कि बताया जा चुका है कि शनि को कर्म और न्याय का ग्रह माना जाता है, इसलिए इस दौरान व्यक्ति को अपने काम और मेहनत के अनुसार परिणाम प्राप्त होते हैं। यह समय व्यक्ति को कई तरह की जिम्मेदारियां दे सकता है और उसे अपने जीवन में अनुशासन लाने के लिए प्रेरित कर सकता है। यदि जन्मकुंडली में शनि शुभ स्थिति में हो तो महादशा के दौरान करियर में तरक्की, नौकरी में स्थिरता, पद में बढ़ोतरी और आर्थिक स्थिति बेहतर होने के मौके मिलते हैं। मेहनत से किए गए काम के अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। वहीं अगर शनि कमजोर स्थिति में हो, तो काम में देरी, बार-बार रुकावट, जिम्मेदारियों का बढ़ना और आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
शनि महादशा के दौरान व्यक्ति के जीवन में धीरे-धीरे कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इस महादशा के दौरान व्यक्ति को अपने काम और जिम्मेदारियों को लेकर अधिक गंभीर होना पड़ सकता है। यह समय व्यक्ति को धैर्य रखना और लगातार मेहनत करते रहना सिखाता है। कई बार इस दौरान जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती है, जहां व्यक्ति को बिना घबराए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि मजबूत और शुभ स्थिति में हो, तो शनि की महादशा व्यक्ति के लिए काफी अच्छी साबित होती है। इस दौरान करियर में तरक्की, नौकरी में स्थिरता, पद में बढ़ोतरी और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के मौके मिलते हैं। मेहनत का धीरे-धीरे लेकिन स्थायी व अच्छा परिणाम मिलता है। व्यक्ति अपनी अलग छाप छोड़ता है।
वहीं कुंडली में शनि कमजोर या अशुभ स्थिति में हो, तो इस महादशा में काम में देरी, बार-बार रुकावट, अचानक जिम्मेदारियों का बढ़ना और आर्थिक परेशानियां देखने को मिल सकती है। कई बार व्यक्ति को अपनी मेहनत के अनुसार परिणाम मिलने में समय लग सकता है।
किसी भी जातक की कुंडली में शनि महादशा के दौरान अच्छे व बुरे दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिलते हैं। नीचे जानते हैं इन प्रभावों के बारे में।
|
अंतर्दशा |
अवधि |
प्रभाव |
|
शनि में राहु |
2 वर्ष 10 महीने 6 दिन |
अचानक बदलाव, विदेश से जुड़े अवसर, करियर में नई संभावनाएं |
|
शनि में चंद्रमा |
1 वर्ष 7 महीने |
परिवार का साथ, मन में बदलाव, यात्रा के अवसर |
|
शनि में मंगल |
1 वर्ष 1 महीने 9 दिन |
साहस में वृद्धि, काम में तेजी, नए काम की शुरुआत |
|
शनि में सूर्य |
11 महीने 12 दिन |
करियर में पहचान, मान-सम्मान, पिता का सहयोग |
|
शनि में बृहस्पति |
2 वर्ष 6 महीने 12 दिन |
ज्ञान में वृद्धि, करियर में प्रगति, आर्थिक लाभ |
|
शनि में शनि |
3 वर्ष 1 दिन |
करियर में स्थिरता, मेहनत का फल, जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी |
|
शनि में बुध |
2 वर्ष 8 महीने 9 दिन |
व्यापार में लाभ, नई नौकरी के अवसर, काम में सफलता |
|
शनि में केतु |
1 वर्ष 1 महीने 9 दिन |
जीवन में बदलाव, आध्यात्मिक रुचि, पुराने कामों से दूरी |
|
शनि में शुक्र |
3 वर्ष 2 महीने |
आर्थिक लाभ, सुख-सुविधाओं में वृद्धि, प्रेम संबंधों में सुधार |
इस महादशा में यदि शनि शुभ स्थिति में हो तो मान-सम्मान, उच्च पद और व्यापार में लाभ मिलता है। अशुभ स्थिति पर मानसिक तनाव, कष्ट और कार्य में बाधा आती है।
ज्योतिष में चंद्रमा और शनि शत्रु ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में इस महादशा के दौरान उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। मानसिक अशांति, पारिवारिक कलह, स्वास्थ्य में कई प्रकार की परेशानियां और भावनात्मक भारीपन महसूस हो सकता है।
ज्योतिष में यह अवधि बेहद संघर्षपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह दोनों ग्रह आक्रामक ग्रह है। इसलिए इस दौरान जातक का स्वभाव गुस्सैला, जीवनसाथी में मतभेद और रक्त या पेट संबंधी परेशानियां होने की संभावना होती है।
यह अवधि काफी चुनौतीपूर्ण होती है। यह अवधि जातक के जीवन में कड़ा संघर्ष, मानसिक तनाव, डर, भ्रम और कार्यक्षेत्र में अस्थिरता ला सकती है।
यह चरण सभी चरणों में सबसे अच्छी मानी जाती है। इस चरण में जातक को राहत महसूस होती है। इस अवधि ज्ञान, आध्यात्मिकता और धर्म-कर्म में वृद्धि के साथ करियर में नई ऊंचाइयां मिलती है।
इस दौरान जातक को कर्मों के अनुसार शुभ या अशुभ फल मिलते हैं। यदि शनि शुभ हो तो मान-सम्मान, उच्च पद और व्यापार में लाभ मिलता है। अशुभ होने पर मानसिक तनाव, कष्ट और कार्य में बाधा आ सकती है।
यह अवधि जातकों के लिए सामान्य परिणाम देने वाली साबित हो सकती है। इस दौरान करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों के लिए शुभ मानी जाती है। जातक की बुद्धि, मान-सम्मान में बढ़ोतरी और दान-पुण्य में रुचि बढ़ती है।
इस अवधि के दौरान जातक को जीवन में कई प्रकार के संघर्ष, कार्य में रुकावट या विदेश यात्रा के योग बनते हैं। आध्यात्मिक कार्यों में मन लगने लगता है।
शनि और शुक्र के बीच मित्रता का संबंध है। ऐसे में इस दौरान अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। यह अवधि भौतिक सुख-सुविधाओं, वैवाहिक सुख और वैवाहिक व व्यावसायिक सफलता के लिए अच्छी मानी जाती है।
शनि की महादशा में कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
अपनी कुंडली में शनि की महादशा कब शुरू होगी और कितने समय तक चलेगी, यह जानने के लिए आप एस्ट्रोटॉक की महादशा कैलकुलेटर पर जाकर चेक कर सकते हैं। इसमें आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म समय व जन्म स्थान जैसी जानकारी दर्ज कर पूरी विस्तार से महादशा की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
A: शनि महादशा के खत्म होने पर व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, कार्यों में स्थिरता और कड़े संघर्ष के बाद सफलता या राहत के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
A: शनि की 19 साल की महादशा का अंतिम चरण गुरु की अंतर्दशा होती है, जो शनि महादशा के अंत में आती है और राहत व आध्यात्मिकता का अहसास कराती है।
A: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर और कुंभ राशि शनि देव की अपनी राशियां हैं, जो सबसे प्रिय है।
A: कुंडली या जीवन में शनि के शुभ होने पर व्यक्ति के स्वभाव, आचरण और शारीरिक लक्षणों में स्पष्ट बदलाव दिखाई देते हैं।
A: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, तुला, मकर, कुंभ और वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि की महादशा सबसे अधिक शुभ और फलदायी मानी जाती है।