17 वर्षों का यह चरण देता है तीक्ष्ण बुद्धि, व्यापारिक समझ और संवाद
सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे करीब ग्रह बुध है। बुध महादशा की बात करें तो यह किसी भी जातक के जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस महादशा की कुल अवधि 17 साल होती है। ज्योतिष में बुध वाणी, संचार, व्यापार, बुद्धि के कारक हैं और वाणी व बुद्धि से ही जातक को जीवन में सफलता प्राप्त होती है। ऐसे में, बुध की महादशा (budh ki mahadasha) व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि बुध की महादशा कैसे परिणाम देती है और यह जीवन के किस क्षेत्र में अधिक प्रभाव डालती है। तो बता दें कि बुध की महादशा का परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि बुध आपकी जन्म कुंडली में किस स्थिति में विराजमान हैं। एस्ट्रोटॉक के इस लेख में हम आपको बुध की महादशा के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही, उपाय व इस दौरान क्या करें क्या न करें इस बारे में भी चर्चा करेंगे।
विंशोत्तरी दशा के अनुसार, हर ग्रह एक निश्चित समय तक किसी भी जातक के जीवन पर प्रभाव डालता है। बुध की महादशा, शनि की 19 साल की महादशा के बाद और केतु की सात साल की महादशा से पहले आती है, जो कुल 17 सालों तक चलती है। बुध बुद्धि, पढ़ाई, बोलचाल, समझदारी, निर्णय लेने की क्षमता, व्यापार आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए बुध की महादशा के दौरान बिज़नेस, लेखन, बातचीत से जुड़े कामों में प्रभाव देखने को मिलता है।
यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध शुभ स्थिति में उपस्थित हो तो महादशा के दौरान बातचीत करने के तरीका प्रभावशाली होता है, करियर व व्यापार में शानदार परिणाम मिलते हैं और जातक की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। मजबूत बुध व्यक्ति को आर्थिक रूप से संपन्न बनाता है और पारिवारिक जीवन में भी सुखद फल मिलते हैं। इसके अलावा, शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है। वहीं अगर बुध कमजोर स्थिति में विराजमान हो तो इस दौरान व्यापार, करियर, नौकरी, पारिवारिक जीवन व आर्थिक जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, धन हानि की संभावना भी बढ़ जाती है।
बुध की महादशा के दौरान व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, बातचीत करने का तरीका और नई चीजें सीखने की इच्छा बढ़ सकती है। पढ़ाई, लेखन, मीडिया, मार्केटिंग, बिजनेस और बातचीत से जुड़े कामों में नए मौके मिल सकते हैं। व्यक्ति का सोशल नेटवर्क बढ़ता है और वह लोगों के सामने प्रभावी तरीके से अपनी बात कहने में सक्षम होता है। इस दौरान छोटी-छोटी यात्राएं सफल होती है और नए लोगों से संपर्क बढ़ता है। वहीं कमजोर बुध सोचने और फैसले लेने की क्षमता कमजोर होती है और गलतफहमियां बढ़ती हैं।
किसी भी व्यक्ति की कुंडली में बुध की महादशा शुरू होते ही जीवनशैली व व्यवहार में असर देखने को मिलता है। ये प्रभाव शुभ व अशुभ दोनों हो सकते हैं। आइए जानते हैं बुध की महादशा का प्रभाव।
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अंतर्दशा |
अवधि |
प्रभाव |
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बुध में बुध की अंतर्दशा |
2 साल 4 महीने 27 दिन |
करियर में तरक्की, व्यापार में लाभ, नई संभावनाएं |
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केतु में बुध की अंतर्दशा |
11 महीने 27 दिन |
मन में बदलाव, आध्यात्मिक रुचि, पुराने कामों से दूरी |
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बुध में शुक्र की अंतर्दशा |
2 साल 10 महीने |
आर्थिक लाभ, प्रेम में बढ़ोतरी, सुख-सुविधाओं में वृद्धि |
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बुध में सूर्य की अंतर्दशा |
10 महीने 6 दिन |
करियर में पहचान, मान-सम्मान, पिता का सहयोग |
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बुध में चंद्रमा की अंतर्दशा |
1 साल 5 महीने |
परिवार का साथ, भावनात्मक सुख, यात्रा के अवसर |
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बुध में मंगल की अंतर्दशा |
11 महीने 27 दिन |
साहस में वृद्धि, काम में तेजी, नई शुरुआत |
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बुध में राहु की अंतर्दशा |
2 साल 6 महीने 18 दिन |
अचानक लाभ, नए अवसर, विदेश से जुड़े मौके |
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बुध में बृहस्पति की अंतर्दशा |
2 साल 3 महीने 6 दिन |
ज्ञान में वृद्धि, करियर में प्रगति, आर्थिक लाभ |
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बुध में शनि की अंतर्दशा |
2 साल 8 महीने 6 दिन |
मेहनत का फल, नौकरी में स्थिरता, जिम्मेदारियों में वृद्धि |
यह पूरी महादशा का शुरुआती दौर होता है, जो विंशोत्तरी दशा क्रम में सबसे पहले आती है। इस दौरान व्यक्ति में नए स्किल्स सीखने की इच्छा होती है। यदि बुध शुभ स्थिति में हो तो व्यापार व नौकरी में तरक्की मिलती है। ये अवधि आगे बढ़ने और सीखने की होती है।
बुध की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा के दौरान कुछ ख़ास परिणाम प्राप्त नहीं होते क्योंकि बुध और चंद्रमा शत्रु ग्रह हैं, इसलिए इस दौरान मिले-जुले परिणाम मिलने की संभावना होती है। मन में चंचलता बहुत बढ़ सकती है। व्यक्ति एक फैसले पर टिका नहीं रहता। कई रोग जैसे सर्दी, खांसी व बुखार से व्यक्ति परेशान हो सकता है।
बुध की महादशा में मंगल की अंतर्दशा का समय वैदिक ज्योतिष में मिला-जुला समय होता है। इस दौरान व्यक्ति ऊर्जा से भरा होता है। मंगल साहस और आक्रमता का प्रतीक है, ऐसे में व्यक्ति के अंदर क्रोध बढ़ सकता है, जिससे वाद-विवाद होने की संभावना अधिक होती है। हालांकि, टेक्निकल, इंजीनियरिंग और कोडिंग से जुड़े लोगों के लिए यह अच्छा समय माना जाता है।
बुध की महादशा में राहु की अंतर्दशा का समय भ्रम और माया का होता है। यदि राहु शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति राजनीति में अपनी अलग छाप छोड़ता है। अचानक धन लाभ मिलता है। लेकिन वही अशुभ स्थिति में व्यक्ति को गलत संगति, जुआ और धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।
गुरु की अंतर्दशा में ज्ञान और विवेक का मिश्रण है। यह समय शिक्षा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए बेहतर होती है। इस दौरान घर में मांगलिक कार्य किया जा सकता है।
बुध की महादशा में शनि की अंतर्दशा का चरण अंतिम होता है। जैसा कि शनि न्याय और कर्म के कारण होते हैं। ऐसे में इस समय व्यक्ति को अपनी मेहनत का परिणाम प्राप्त होता है। तरक्की भले ही धीमी होती हो लेकिन फल स्थायी मिलता है।
बुध की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा बुधादित्य योग जैसा प्रभाव देते हैं। इस दौरान व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है। इसके अलावा, नौकरी में प्रमोशन की भी संभावना अधिक होती है।
बुध की महादशा में केतु की अंतर्दशा के दौरान मन इधर उधर जल्दी भटक सकता है। केतु अलगाव के कारक हैं। ऐसे में, रिश्ते में समस्या पैदा होने पर बात अलगाव तक पहुंच सकती है। इस समय व्यक्ति का मन भी काम में कम लग सकता है।
बुध की महादशा शुक्र की अंतर्दशा सबसे अनुकूल समय होता है। बुध और शुक्र मित्र ग्रह है। ऐसे में व्यक्ति को प्रेम जीवन में अच्छे परिणाम मिलते हैं। व्यक्ति भौतिक इच्छाएं पूरी होती है। कला व संगीत में व्यक्ति की रुचि बढ़ती है।
बुध की महादशा में कई चीजों का ध्यान जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
अपनी कुंडली में बुध की महादशा कब शुरू होगी और कितने समय तक चलेगी, यह जानने के लिए आप एस्ट्रोटॉक की महादशा कैलकुलेटर पर जाकर चेक कर सकते हैं। इसमें आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म समय व जन्म स्थान जैसी जानकारी दर्ज कर पूरी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
A: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है, तो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्तर पर कई संकेत मिलने लगते हैं।
A: इस दौरान कई उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें से एक है बुधवार को हरे वस्त्र पहनना चाहिए।
A: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह हरे रंग, सुगंधित चीजों, और मधुर वाणी से प्रसन्न होते हैं।
A: कुंडली में बुध के कमजोर या पीड़ित होने (बुध दोष) से व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक जीवन पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव व लक्षण दिखाई देते हैं।
A: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भगवान विष्णु को बुध (मर्करी) ग्रह का मुख्य अधिष्ठाता और नियंत्रित करने वाला देवता माना जाता है।