नक्षत्र आश्लेषा

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अश्लेषा नक्षत्र

पुरुषों का व्यक्तित्व

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे पुरुष को समझना थोड़ा कठिन होता है। ये लोग बहुत बुद्धिमान और चालाक होते हैं साथ ही किसी भी स्थिति को अपने पक्ष में कैसे मोड़ना है, इसे बखूबी जानते हैं। इस प्रकार के जातक व्यावसायिक मानसिकता के होते हैं। अश्लेषा नक्षत्र के पुरुषों के दो पक्ष होते हैं। बाहरी पक्ष, जो उसे एक दयालु व्यक्ति के रूप में दर्शाता है। जबकि दूसरा आंतरिक पक्ष, जिसमें वह थोड़े स्वार्थी होते हैं। हालांकि, स्वार्थ इन लोगों के पक्ष में काम करता है क्योंकि वे इसका उपयोग खुद पर ध्यान केंद्रित करने और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। इस नक्षत्र के पुरुषों का मानना ​​है कि अगर वह जीवन में अच्छा कर रहे हैं, तभी वह दूसरों का भला कर पाएगें। कुल मिलाकर, अश्लेषा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति स्वभाव से मददगार होता है और एक ऐसे नेता के रूप में उभरते हैं, जिस पर कोई भी भरोसा कर सकता है।

पुरुषों का करियर

जब पेशे की बात आती है, तो अश्लेषा नक्षत्र में पैदा हुआ पुरुष रचनात्मकता से जुड़े कार्यों में बहुत अच्छा करता है। कला और वाणिज्य जैसे क्षेत्र इनके लिए उपयुक्त हैं, भले ही ये विज्ञान में अच्छे हैं। निश्चित रूप से भविष्य में आगे चलकर आप अपने लिए कुछ अच्छा करना चाहेंगे और इसमें आपकी रचनात्मक प्रवृत्ति आपकी मदद करेगी। हालांकि, अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वाले पुरुषों को व्यवसाय के मामले में सावधानी से चलना चाहिए क्योंकि 35 वर्ष की आयु तक मौद्रिक दृष्टि से भारी नुकसान होने की आशंका है। एक बार यह समय अवधि गुजर जाए, तो इसके बाद आप और आपका व्यवसाय खूब बढ़ते जाएंगे।

पुरुषों की अनुकूलता

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे पुरुष स्वभाव से बहुत अच्छे साथी होते हैं। वह सबकी जिम्मेदारियों का वहन बहुत अच्छी तरह से करते हैं। भले ही उनके पैरेंट्स और पत्नी उन जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम हों। जब ये इस नक्षत्र के पुरुष किसी नए रिश्ते में बंधते हैं या शादी करते हैं, तो उनके साथ के लिए इन्हें और इनके मूड को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। इस समस्या को सलुझाने के लिए पति-पत्नी को साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए। जैसे-जैसे पति-पत्नी एक-दूसरे को जानेंगे, वैसे-वैसे उनके बीच पसरी दूरी कम हो जाएगी। इस तरह इनका वैवाहिक जीवन लंबे समय तक सुखी रहेगा।

पुरुषों का स्वास्थ्य

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे पुरुषों को सक्रिय जीवनशैली अपनानी चाहिए। हालांकि, इन्हें किसी तरह की कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन मन की थकान इन्हें हमेशा परेशान किए रहती है। अश्लेषा नक्षत्र के पुरुषों को उन लक्षणों से सावधान रहने की जरूरत है जो पीलिया, पाचन समस्याओं और पैरों और घुटनों के जोड़ों के दर्द का कारण बन सकते हैं।

महिलाओं का व्यक्तित्व

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं दूसरों की बहुत ज्यादा देखभाल करती हैं। लेकिन इनमें आत्म-नियंत्रण की कमी होती है। उनका यही स्वभाव भविष्य में इन्हें सफलता की ओर बढ़ने से रोकता है। हालांकि, ये महिलाएं अगर बाहरी चीजों से विचलित होना छोड़ दें तो इनके सफलता की दर में तेजी से वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, अश्लेषा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं शर्मीले स्वभाव की होती हैं। इसी वजह से वे किसी के साथ आसानी से घुलमिल नहीं पाती हैं। लेकिन लोगों को लगता है कि इनमें बहुत ज्यादा एटीट्यूड है। इस वजह से इन्हें दूसरों से मिलना पसंद नहीं होता है। हालांकि दूसरे इनके बारे में क्या सोचते हैं, इस संबंध में अश्लेषा नक्षत्र की महिलाएं ज्यादा चिंतित नहीं होती हैं। ये महिलाएं काफी बहस करती हैं और कई बार यह जानते हुए भी बहस करना नहीं छोड़तीं कि ये गलत हैं। असल में इन्हें किसी से कमतर साबित होता है या किसी के साथ बहस में हारना पसंद नहीं है। इन महिलाओं को अपनी इस आदत पर काम करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाए, तो इनके प्रियजन भी इनसे दूर हो जाएंगे।

महिलाओं का करियर

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं आमतौर पर ज्यादातर कामों में परफेक्ट होती हैं। भविष्य में प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़कर काम करने की संभावना बनेगी। अगर ये महिलाएं किसी वजह से शिक्षित न हो पाईं, तो भी ये अपना खुद का व्यवसाय शुरू करेंगी। उनका निजी व्यवसाय 40 साल की उम्र तक तेजी से बढ़ेगा। लेकिन व्यसाय करते हुए इन महिलाओं को दूसरों की बातों पर विशेष ध्यान नहीं देना चाहिए। अश्लेषा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं अपने कामकाजी जीवन से जल्दी सेवानिवृत्त होना चाहती हैं और सौभाग्यवश वे ऐसा कर सकेंगी।

महिलाओं की अनुकूलता

अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वाली महिला बहुत ही पारिवारिक प्रवृत्ति की होती हैं। लेकिन इनका दायरा यहीं तक सीमित नहीं होता है। उन्हें अपने पति और ससुराल द्वारा कितनी आजादी मिली है, उसी पर उनके रिश्ते निर्भर करते हैं। इस नक्षत्र की महिलाएं अपनी मां की तुलना में पिता के साथ ज्यादा जुड़ाव महसूस करती हैं। इनका स्वभाव चूंकि बहुत ही शर्मीला होता है, इसलिए किसी के साथ संबंध में बंधने में इन्हें काफी समय लगता है।

महिलाओं का स्वास्थ्य

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं इसी नक्षत्र के पुरुषों की तुलना में अधिक सक्रिय होती हैं। हालांकि, इन्हें उनकी तुलना में ज्यादा दवाइयां लेनी पड़ती हैं। साथ ही, अश्लेषा नक्षत्र में जन्म लेने वाली महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना चाहिए। कोई भी लक्षण नजर आने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। इन महिलाओं को जो रोग परेशान कर सकते हैं वे हैं जलोदर (ड्रॉप्सी), पीलिया, अपच, हिस्टीरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही नर्वस ब्रेकडाउन होने की भी आशंका बनी हुई है।

प्रथम चरण

अश्लेषा नक्षत्र का पहला चरण धनु नवांश में आता है और बृहस्पति द्वारा शासित होता है। इस चरण में जन्म लेने वाले जातक देखभाल करने वाले और भावुक होते हैं। इसी के साथ जीवन में कई तरह से धन प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखते हैं और अक्सर दूसरों की भलाई करने के लिए कार्यरत रहते हैं।

द्वितीय चरण

अश्लेषा नक्षत्र का दूसरा चरण मकर नवांश में आता है और शनि का स्वामी होता है। इस चरण में जन्म लेने वाले जातक चतुर और होशियार होते हैं। ये लोग आपको अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने से नहीं कतराते।

तृतीय चरण

अश्लेषा नक्षत्र का तीसरा चरण कुंभ नवांश में आता है और शनि द्वारा शासित होते हैं। इस चरण में जन्म लेने वाले लोग स्वभाव से बहुत ही सीक्रेटिव होते हैं। इन लोगों को अन्य लोगों की तुलना में त्वचा रोग होने का खतरा अधिक होता है।

चतुर्थ चरण

अश्लेषा नक्षत्र का चौथा चरण मीन नवांश में आता है और बृहस्पति द्वारा शासित होता है। इस चरण में पैदा हुए लोग कुछ भी गलत होने की जिम्मेदारी खुद ले लेते हैं। इन्हें अपनी मां से भरपूर प्यार मिलता है और धन की प्राप्ति भी होती है।

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